श्रीगंगानगर : राजस्थान के श्रीगंगानगर में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो एक्ट) मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेंद्र खरे ने आज छात्रा का अपहरण कर दुष्कर्म करने के आरोपी को 20 वर्ष का कारावास की सजा सुनाई। विशिष्ट लोक अभियोजक गुरचरणसिंह रुपाणा एडवोकेट ने बताया कि सादुलशहर कस्बे में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक किशोरी सुबह स्कूल जाने का कहकर घर से गई और शाम को वापस नहीं आई। परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने कुछ ही दिन बाद नाबालिग लड़की को पंजाब के समीपवर्ती फाजिल्का जिले के गांव रूपनगर से बरामद कर लिया।
लड़की को बाल कल्याण समिति(सीडब्ल्यूसी)के समक्ष पेश किए जाने पर उसने अपने मां-बाप के साथ जाने की इच्छा जाहिर की। इससे पहले पुलिस ने उसका मेडिकल चेकअप करवाया, जिसमें उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की पुष्टि हुई।
अपहरण के मुकदमे में पुलिस ने दुष्कर्म की धाराएं शामिल कर प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में चालान प्रस्तुत होने पर अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान 13 गवाह और 36 दस्तावेज साक्ष्य पेश किए गए। विद्वान न्यायाधीश सुरेंद्र खरे ने निर्णय देते प्रिंस को अपहरण तथा दुष्कर्म का दोषी करार दिया। उसे पोक्सो एक्ट की धारा 5(एल)/ 6 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) के तहत 20-20 वर्ष कठोर कारावास की सजा और 10-10 हजार रुपए रुपए का अर्थ दंड लगाया।
