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गाजियाबाद में मीट फैक्ट्री से 57 बच्चों का रेस्क्यू

इनमें 31 लड़कियां; बंगाल-बिहार से लाकर बंधक बनाया, जानवर कटवाते थे
गाजियाबाद।
गाजियाबाद में स्लॉटर हाउस से 57 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने पुलिस के साथ छापा मारा। रेस्क्यू किए गए बच्चों में 31 लड़कियां और 26 लड़के शामिल हैं। इन सभी से पशु काटने का काम कराया जा रहा था।
आयोग के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो ने बताया, गाजियाबाद के मसूरी इलाके में इंटरनेशनल एग्रो फूड नाम से स्लॉटर हाउस है। पुख्ता इनपुट मिलने पर बुधवार को रेड डाली गई। 57 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया। स्लाटर हाउस का मालिक यासीन कुरैशी है। यासीन के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
बच्चों की उम्र 18 साल से कम
गाजियाबाद पुलिस के एडीसीपी (क्राइम) सच्चिदानंद ने बताया, यहां पशुओं का मीट पैकिंग करने का काम किया जाता है। यहां से देश और विदेश के लिए पैकिंग कर मीट की सप्लाई की जाती है। रेस्क्यू किए गए बच्चे पश्चिम बंगाल और बिहार से लाए गए थे।
यहां इनसे गलत तरीके से काम लिया जा रहा था। बच्चे यहां मीट की पैकिंग और कटिंग का काम कर रहे थे। सभी 57 बच्चों की आयु 18 साल से कम है। इनमें कई नाबालिग ऐसे हैं, जिन्हें बंधक बनाकर चार-पांच साल से काम करा रहे थे।
300 रुपए दिहाड़ी पर काम करते थे बच्चे
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के कार्यकर्ता करण सिंह ने बताया, इंटरनेशनल एग्रो फूड्स स्लॉटर हाउस में काफी समय से शिकायतें मिल रही थी। जिसके बाद कमेटी ने स्थानीय पुलिस को साथ लेकर छापा मारा। सभी बच्चे 300 रुपए की दिहाड़ी पर काम कर रहे थे।
करण सिंह ने बताया- कंपनी के स्लॉटर हाउस के मालिक पर मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। मसूरी थाना प्रभारी ने बताया कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की तरफ से शिकायत दी गई है। मामले में स्नढ्ढक्र दर्ज की गई है। फिलहाल बच्चों के नाम और पते पूछकर उनके घर पहुंचाया जा रहा है।
मसूरी थाना प्रभारी ने बताया- बच्चों से पूछताछ में पता चला है कि उन्हें 10-15 हजार रुपए नौकरी का लालच देकर बिहार, पश्चिम बंगाल, यूपी के मुरादाबाद-बरेली से यहां पर लाया गया था। सभी से पशुओं को काटने का काम कराया जा रहा था। लड़कियों से मीट पैकिंग का काम कराते थे।

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