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इलाज के लिए तरसते हैं कटवारिया सराय गांव के निवासी

-युवा समाजसेवी सुनील सनसनवाल गांव में डिस्पेंसरी के लिए कर रहे हैं जद्दोजहद

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार भले ही स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास के ढोल पीटती रहे, लेकिन दिल्ली में आज भी ऐसे गांव हैं जहां ग्रामीणों के इलाज के लिए एक डिस्पेंसरी तक नहीं है। ऐसा ही एक गांव है कटवारिया सराय। यहां के लोग छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे गांवों पर आश्रित हैं। अब ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान करने का बीड़ा युवा समाजसेवी सुनील सनसनवाल ने उठाया है। सुनील गांव में डिस्पेंसरी खुलवाने के लिए लगातार जद्दोजहद कर रहे हैं।

सुनील बताते हैं कि आसपास के गांवों से तुलना करें तो कटवारिया सराय स्वास्थ्य के मामले में बिलकुल पिछड़ा हुआ है। इस गांव के बगल में बेर सराय और लाडो सराय जैसे गांवों में एक से ज्यादा डिस्पेंसरी हैं। लेकिन कटवारिया सराय में एक भी नहीं। गांव वालों ने इसके लिए भरपूर कोशिश भी की, लेकिन गांव के चुने हुए प्रतिनिधियों ने हमेशा अपनी आंखें मूंदे रखीं। इसके चलते कोविड महामारी जैसी स्थिति में गांव के लोगों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ा, उसे बयान भी नहीं किया जा सकता। सुनील बताते हैं कि कोविड काल गुजरने के बाद भी छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए कटवारिया सराय के लोगों को पड़ोसी गांवों में जाना पड़ता है। इन परेशानियों से निजात पाने के लिए सुनील ने गांव वालों के साथ मिलकर एक ऐसे स्थान का चयन किया है जहां नगर निगम को काफी नुकसान होता है। करोड़ों रुपए की लागत से बनी कम्युनिटी सेंटर की इमारत जर्जर हो रही है। अब हम सभी गांव वाले चाहते हैं कि इस इमारत का कुछ हिस्सा डिस्पेंसरी के लिए प्रयोग में लाया जाए ताकि करीब एक लाख की आबादी के इस गांव वालों को गांव में ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। इसके लिए नगर निगम से लेकर दिल्ली सरकार तक सभी संबंधित विभागों से बातचीत का प्रयास किया जा रहा है।

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