नेबुलाइजर की मांग बढ़ी
गाजियाबाद : गिरते तापमान और बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इतनी ही नहीं इन मरीजों को नेबुलाइजर की जरूरत पड़ रही है। सरकारी अस्पताल में रोजाना पांच से छह मरीजों को इसकी जरूरत पड़ रही है। वहीं निजी अस्पतालों में भी नेबुलाइज कराने वाली मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
पटेल नगर निवासी आलोक कुमार गर्ग को पिछले कुछ समय से सांस की बीमारी से पीड़ित है। हर साल सर्दी बढ़ने के साथ उन्हे सांस लेने में तकलीफ होती है। दीपावली के आसपास प्रदूषण बढ़ने के साथ दिक्कत ज्यादा होती है। इस बार दीपावली पर तो ज्यादा दिक्कत नहीं हुई लेकिन बढ़ते प्रदूषण के कारण आलोक की हालत खराब हो गई। उनके पुत्र वैभव गर्ग गुरूवार की रात निजी अस्पताल में नेबुलाइज कराया।
वहीं नेहरूनगर निवाली लोकेश कुमार की 14 साल की बेटी को सांस की समस्या है। पिछले कई दिनों से उसे दिक्कत हो रही थी। लोकेश ने इस बार बाजार से 15 सौ रुपये का नेबुलाइजर खरीदा। चिकित्सक की सलाह पर नेबुलाइजर में दवा डालकर बेटी को रोजाना रात के समय नेबुलाइज करा रहे हैं। लोकेश के मुताबिक उनकी बेटी साइकिल से स्कूल जाती है। सुबह के समय ज्यादा धूंध होने के कारण ज्यादा दिक्कत आई है।
चिकित्सक दे रहे नेबुलाइज कराने की सलाह
शहर के वरिष्ठ फिजीशियन डा. बीबी जिंदल के मुताबिक कोरोना काल के बाद से लोगों को ज्यादा दिक्कत हुई है। बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। लोगों को सलाह दी गई है कि यदि सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो वह चिकित्सक की सलाह पर सामान्य दवाओं के जरिए घर पर नेबुलाइज कर सकते हैं। इसमें कोई परेहज नहीं है। मरीजों की सलाह दी जा रही है कि वह आपात स्थिति के लिए घर पर छोटी नेबुलाइजर मशीन जरूर रखे। कोरोना कॉल में लोगों को इससे काफी राहत मिली थी।
मेडिकल स्टोर पर बढ़ी नेबुलाइजर मशीन की मांग
बढ़ती ठंड व प्रदूषण के कारण नेबुलाइजर मशीन की मांग बढ़ गई है। लोग घर में छोटे बच्चे व बुजुर्ग लोगों को लिए इसे मशीन को ज्यादा खरीद रही है। मेडिकल स्टोर पर यह मशीन 12 सौ से 15सौ रुपये में मिल रही है। दवा कारोबारी सचिन कुमार के मुताबिक उनके पास दो से तीन मशीन हमेशा उपलब्ध रहती है। मांग के अनुसार ज्यादा मशीन मंगवाई गई है। रोजाना एक या दो लोग मशीन खरीद रहे हैं। इसके साथ ही जानकारी लेने वालों की संख्या भी काफी है।
अस्पतालों में करना पड़ रहा है इंतजार
सांस के मरीजों को अल सुबह या फिर शाम के समय सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि सांस के मरीदों को सीओपीडी की दौरा भी ज्यादातर इन्ही दोनों समय पड़ता है। यहीं कारण है कि सुबह व शाम के समय अस्पतालों में मरीजों को नेबुलाइज कराने वालों की संख्या लगातार बढ रही है। कई अस्पतालों में तो मरीजों को इसके लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। इन मरीजों पर घर पर मौजूद छोटी मशीन काम नहीं कर रही है।
मौसम में छाई धुंध, लोगों ने किया सुबह की सैर से की तौबा
पिछले कई दिनों से आसमान में धूंध छाई हुई है। इस कारण सुबह के समय पार्कों में सैर करने वाले लोगों की संख्या कम हो गई है। सुबह के समय कालोनियों के पार्कों में घूमने वाले बुजुर्गों की संख्या भी कम हो गई है। चिकित्सक बुजुर्गों को सुबह व शाम के समय सैर करने से इंकार करे रहे हैं। इसकी वजह यह है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण उन्हे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। साथ ही धूंध के कारण आंख, नाक व गले की समस्या भी आ सकती है।
लोगों को सलाह दी जाती है कि वह सुबह शाम की सैर से परहेज करे। प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का प्रयोग करें। घर में बुजुर्ग या बच्चे हैं तो नेबुलाइजर मशीन जरुर रखे। चिकित्सक की सलाह में सांस लेने में तकलीफ या छाती में बलगम जमा होने पर नेबुलाइज जरुर करें।
