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रेवा यूनिवर्सिटी ने प्रस्तुत किया पंचवक्त्रम

शिव के पांच रूप जो बनाते हैं ब्रह्मांड के पांच तत्व
संसाधनों की कमी और लैंगिक समानता पर अनोखी प्रस्तुति

नई दिल्ली। रेवा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड इंडिक स्टडीज ने शनिवार, 26 नवंबर 2022 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में लैंगिक समानता और जलवायु परिवर्तन जैसे ज्वलंत मुद्दों पर, पंचवक्त्रम प्रस्तुति पेश की। इस अवसर पर नृत्य की दुनिया के दिग्गज पद्म भूषण डा राजा रेड्डी और डा राधा रेड्डी तथा डा सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव ढ्ढत्रहृष्ट्र) उपस्थित थे।
इस प्रस्तुति में प्राचीन भारत की अनोखी गाथाएं जिनमे पांच तत्व: भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश के मधुर मिश्रण और महत्व को शिव के पांच रूपों में व्यक्त किया गया को अपने आप में ही पंचतत्व का प्रमाण हैं।
मोहिनीअट्टम के माध्यम से पृथ्वी के आरंभ पर प्रकाश डाली गई जिसमे शिव के सद्यज्योति अवतार को दर्शाया गया। यह वो अवतार है जिसने भूमि का पार्वती की सहायता से निर्माण किया। उड़िया नृत्य के माध्यम से दूसरे तत्व अथवा जल का संस्मरण किया गया को वामदेव का आदर्शरूप है। अग्निजा का महत्व समझते हुए भारत्नात्य नृत्यकारों ने अघोर का रूप धारण किया। भगवान शिव के तत्पुरुष अवतार को दर्शाते हुए कुचिपुड़ी नर्तकों ने वायु का वर्णन किया है। अंतिम चरण में ईशान अवतार का रूपांतरण है जो आकाश का प्रारंभक है। ब्रह्मांड में ? के उच्चारण का स्रोत शिव का डमरू है जो कथक नृत्यंगो ने दर्शाया।


इस उत्सव के अवसर पर डॉ पी श्यामा राजू (माननीय चांसलर, रेवा यूनिवर्सिटी) ने कहा, हम भाग्यशाली हैं को आज हम इतने दिग्गजों के बीच अपने परिश्रम और कला का प्रदर्शन प्रस्तुत कर पा रहे हैं। हम अपने विश्वविद्यालय में स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देते हैं, प्रकृति में योगदान देने का यह हमारा अपना छोटा सा तरीका है। लैंगिक तटस्थता के साथ-साथ हम कोशिश करते हैं कि दोनों लिंग अपनी विशिष्टता को पहचानें और प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे के पूरक हों।
भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य के लिए विख्यात स्कूल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड इंडिक स्टडीज इस बात से वाकिफ है की वे युवाओं को उपनिषद और वेदों के असीम आनन्द का अनुभव करने के साथ साथ बौधिक और योगिक परंपराओं और स्वामी विवेकानंद के ज्ञान के प्रकाश से अवगत कराएं।


रेवा विश्वविद्यालय के बारे में: रेवा विश्वविद्यालय अधिनियम 2012 के तहत स्थापित, विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त है और एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) द्वारा अनुमोदित है। रेवा विश्वविद्यालय को हर छात्र के समग्र विकास में योगदान देने पर गर्व है। विश्वविद्यालय वर्तमान में 49 पूर्णकालिक स्नातक कार्यक्रम, 28 पूर्णकालिक स्नातकोत्तर कार्यक्रम और 2 अंशकालिक स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करता है। विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग, वास्तुकला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, वाणिज्य, प्रबंधन अध्ययन, कानून, कला और मानविकी और प्रदर्शन कला में कार्यक्रम प्रदान करता है। सर्टिफिकेट/डिप्लोमा और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा में भी कोर्स ऑफर किए जाते हैं। रेवा विश्वविद्यालय सभी विषयों में डॉक्टरेट की डिग्री के लिए अनुसंधान की सुविधा प्रदान करता है। रेवा विश्वविद्यालय संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। पंचवक्त्रम ने टिकाऊ शहरों, जलवायु परिवर्तन से संबंधित एसडीजी और पीएम की नारी शक्ति- लैंगिक समानता की आकांक्षा के साथ गठबंधन किया है।

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