नई दिल्ली : दिल्ली के 10 साल पुराने छावला सामूहिक दुष्कर्म मामले में पीड़िता के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। यह रिव्यू पिटीशन सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई है, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 19 वर्षीय महिला के गैंगरेप और हत्या के मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए तीन लोगों को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को अपना फैसला सुनाया था। अब इस फैसले के लगभग एक महीने बाद, परिवार ने सर्वोच्च अदालत से उक्त फैसले के समीक्षा की मांग की है।
मालूम को महिला को दिल्ली से अगवा किया गया था। बाद में वह हरियाणा में मृत पाई गई थी। यह पुनर्विचार याचिका महिला के पिता की ओर से दाखिल की गई है। इस मामले में पीड़िता के वकील संदीप शर्मा ने कहा कि हमने पीड़िता के माता-पिता की तरफ से रिव्यू पिटीशन दायर की है। कुछ मुद्दे थे जो सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं आ पाए थे। हमने अपने रिव्यू पिटीशन में इन मुद्दों को उठाया है ताकि सुप्रीम कोर्ट देखे और ट्रायल कोर्ट एवं होई कोर्ट के फैसले को कायम रखे।
परिजनों की ओर से दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर के फैसले में रिकॉर्ड के सामने त्रुटियां स्पष्ट हैं। शीर्ष अदालत ने इस मामले में महत्वपूर्ण सबूतों की अनदेखी की। गवाहियों में मामूली विसंगतियों को अनुचित महत्व दिया गया। डीएनए मैच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड के रूप में पर्याप्त सबूत मौजूद थे।
छावला सामूहिक दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल
