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बाढ़ के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा

मथुरा : मथुरा में यमुना के जलस्तर में गिरावट से जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है और बाढ के बाद संक्रामक बीमारियों के संभावित खतरे से निपटने के लिये सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि जलस्तर में लगातार कमी से बाढ़ का असर कम होने लगा है। जिला प्रशासन ने अभी से बाढ के बाद होनेवाली बीमारियों को रोकने के लिए कमर कस ली है तथा मेडिकल एव सफाई टीमों की तैनाती कर दी गई है। बाढ से खाली हुए क्षेत्र में सेल्फी लेने पर भी रोक लगा दी गई है।
प्रयाग घाट पर यमुना का जलस्तर मंगलवार की शाम 167.03 मीटर था जबकि मथुरा में खतरे का निशान 166 मीटर पर है। जिलाधिकारी पुुलकित खरे ने बताया कि सामान्यतया बाढ के बाद बीमारी का प्रकोप होने का खतरा रहता है। इसे देखते हुए चिकित्सकों एवं सफाईकर्मियों की टीमें बाढ प्रभावित क्षेत्रों में सेक्टरवाइज आज से ही लगा दी गई हैं। उनसे कहा गया है कि बाढ़ का पानी जैसे जैसे कम होता जा रहा है उसकी पहले सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा साथ में यदि कोई बीमार है तो उसकी समुचित चिकित्सा व्यवस्था की जानी चाहिए।
जिलाधिकारी ने बताया कि पूरे बाढ प्रभावित क्षेत्र को 14 सेक्टर में बांटा गया है तथा हर सेक्टर में डाक्टरों समेत चार सदस्य होंगे। उनका कहना था कि बाढ का पानी कम होते ही ये टीमें बाढ प्रभावित हुए क्षेत्र के हर घर में जाएंगी । बाढ के बाद सामान्यतया चर्म रोग, पेट के रोग एवं बुखार आदि रोग हो जाते हैं, इसके लिए बाढ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को भी सावधान रहने और शुद्ध जल पीने की सलाह दी है। उनका यह भी कहना था कि दवाइयों की किसी प्रकार की कमी नही है उन्होंने स्वयं दवाइयों का स्टाक चेक किया है तथा भारी मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं।
जिलाधिकारी ने लोगों के अगले तीन दिन तक बाढ से खाली हो रहे क्षेत्र में जाने पर रोक लगाते हुए कहा है कि चूंकि बाढ का पानी कम होने के साथ साथ सिल्ट पड़ी है तथा पानी का बहाव भी तेज है ऐसे में फिसलने से दुर्घटना भी हो सकती है। उन्होंने युवकों से विशेष रूप से कहा है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जाकर न तो सेल्फी लें और ना ही बाढ के पानी में कूदकर स्नान करें। पुलिस से इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

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