नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष सचिन नेगी को राहत नहीं दी है। अदालत ने अध्यक्ष की पुनर्विचार याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने निलंबित अधिशासी अधिकारी (ईओ) आलोक उनियाल के मामले में सरकार के पाले में गेंद डाल दी है। अदालत ने कहा कि सरकार आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तीन सप्ताह के अदंर ईओ उनियाल के प्रत्यावेदन पर विधि सम्मत निर्णय ले।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल और न्यायमूर्ति पकंज पुरोहित की युगलपीठ में आज दोनों की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हुई। मुख्य सचिव एसएस संधु की ओर से अदालत के समक्ष जांच रिपोर्ट पेश की गयी। जांच रिपोर्ट में झूलों के ठेके के आवंटन पर ऊंगलियां उठायी गयी हैं। कहा गया कि आवंटन में प्रक्रियाओं और प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया है।
रिपोर्ट में पूर्व ईओ एके वर्मा, निलंबित ईओ आलोक उनियाल, जेई और टीओ की भूमिका पर भी सवाल उठाये गये हैं। साथ ही सभी के खिलाफ जांच की अनुशंसा की गयी है। सुनवाई के दौरान श्री नेगी की ओर से वित्तीय अधिकार बहाल करने की ठोस पैरवी की गयी। यह भी कहा गया कि अध्यक्ष निर्वाचित प्रतिनिधि है और दो दिसंबर को उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है लेकिन अदालत ने इनकार कर दिया और पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही ईओ उनियाल को निलंबन के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन सौंपने और सरकार को तीन सप्ताह में उस पर उचित निर्णय लेने के निर्देश दे दिये हैं।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने विगत 17 अक्टूबर को अनियमितताओं के आरोप में नगर पालिका के अध्यक्ष की वित्तीय पावर सीज कर उनके कार्य करने पर रोक लगा दी थी। साथ ही तत्कालीन ईओ को भी निलंबित कर दिया था तथा प्रदेश के मुख्य सचिव एसएस संधु को पूरे मामले की जांच के निर्देश दे दिये थे। साथ ही जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने को भी कहा था।
इसके बाद मुख्य सचिव की ओर से शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त निदेशक की अगुवाई में एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गयी। उल्लेखनीय है कि काशीपुर निवासी कृष्ण पाल भारद्वाज की ओर से डीएसए मैदान में लगने वाले झूलों के आवंटन को एक याचिका के माध्यम से चुनौती दी गयी थी। याचिका में आवंटन पर अंगुली उठायी गयी थी।
अदालत ने इसी आधार पर इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दायर कर ली थी। उसी की सुनवाई के आधार पर अदालत ने अध्यक्ष और ईओ के खिलाफ सख्त कार्यवाही की थी। यहां यह भी बता दें कि प्रदेश में नगर निकायों का कार्यकाल आगामी 02 दिसंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे में अदालत के फैसले से श्री नेगी और कांग्रेस पार्टी के समक्ष भविष्य को लेकर एक बड़ा प्रश्न खड़ा होना लाजिमी है।
सचिन नेगी को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
