चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गये तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका बुधवार को खारिज कर दी। सेंथिल बालाजी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले वर्ष गिरफ्तार किया था।
यह दूसरी बार है, जब पूर्व मंत्री की जमानत याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। इससे पहले न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन ने अक्टूबर 2023 में इस तथ्य पर ध्यान देने के बाद उनकी पिछली याचिका खारिज कर दी थी कि वह न्यायिक हिरासत में होने के बावजूद मंत्री बने रहे और उनके भाई एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सह-अभियुक्त अशोक कुमार फरार हैं।
प्रधान सत्र न्यायालय पहले ही तीन बार उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने आज जमानत याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया कि जहां तक संभव हो, प्रतिदिन कार्यवाही करके तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी की जाये, क्योंकि याचिकाकर्ता 250 दिन से अधिक समय से जेल में है। इससे पहले, न्यायाधीश ने 22 फरवरी को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
गौरतलब है कि प्रधान सत्र न्यायालय ने 20 फरवरी को श्री सेंथिल बालाजी की न्यायिक हिरासत चार मार्च तक बढ़ा दी थी। तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी.वी. आनंद ने पूर्व मंत्री एवं द्रविड़ मुनेत्र कषगम् विधायक की रिमांड बढ़ाते हुए उन्हें आरोप मुक्त करने की मांग वाली याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए ईडी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
रिमांड की अवधि समाप्त होने पर श्री सेंथिल बालाजी को पुझल सेंट्रल जेल से वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया और तब उनकी रिमांड 22वीं बार चार मार्च तक बढ़ा दी गयी। वर्ष 2011 से 2015 के बीच राज्य की तत्कालीन अन्नाद्रमुक सरकार में परिवहन मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान नौकरी के बदले नकदी घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उन्हें पिछले साल ईडी ने गिरफ्तार किया था।
सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका दूसरी बार खारिज
