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12 छात्र नेताओं के निष्कासन पर एसएफआई का धरना,प्रदर्शन

शिमला : स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) इकाई ने विश्वविद्यालय से 12 नेताओं के निष्कासन पर शनिवार को धरना व प्रदर्शन किया। आज विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किये गए अवैध रूप से एसएफआई के 12 छात्र नेताओं के निष्कासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में बात रखते हुए कैंपस सह-सचिव गौरव ने कहा की जब से देश और हिमाचल प्रदेश के अंदर एसएफआई का निर्माण हुआ है उस समय से लेकर जनवादी, प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था को हासिल करने के लिए काम कर रही है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंदर भी 1978-79 से विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक माहौल को बनाते हुए छात्रों के मुद्दों को उठाने का लगातार काम कर रही है।
जब भी विश्वविद्यालय के अंदर एसएफआई ने प्रशासन और प्रदेश सरकारों के खिलाफ लगातार आंदोलन तैयार करने की कोशिश की है और उन पर दबाव बनाने की कोशिश की है। सरकारों और प्रशासन ने छात्रों की एकता को तोड़ने का लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि आज जब एस एफ आई कैंपस के अंदर पिछली भाजपा सरकार द्वारा और पूर्व कुलपती सिकंदर कुमार के द्वारा विश्वविद्यालय में जो धांधलिया की है। उसके खिलाफ लगातार आंदोलन कर रही है। परंतु जब सत्ता के अंदर कांग्रेस की सरकार नहीं थी उन्होंने सत्ता में आने से पहले यह वादा किया था कि विश्वविद्यालय के अंदर जो भ्रष्टाचार हुआ है उसके खिलाफ करवाई करेगी।
कांग्रेस सरकार ने अभी तक किसी भी तरह से विश्वविद्यालय के अंदर हुई धांधलियों के खिलाफ किसी भी तरह का कम नहीं उठाया है। जब एस एफ आई प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ और इन धांधलियों के खिलाफ लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाने का काम कर रही थी तो उस समय कांग्रेस सरकार के पिट्ठू संगठन एनएसयूआई के बाहरी गुंडों द्वारा विश्वविद्यालय कैंपस के अंदर आकर एसएफआई के कार्यकर्ताओं पर नुकीले हथियारों और डंडों से हमला करवाकर कैंपस का माहौल खराब किया जाता है।

एसएफआई का मानना है कि यह हमला विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार की मिली भगत से सुनियोजित तरीके से करवाया गया है। जिसमें तीन छात्र नेताओं को गहरी चोटे लगती हैं। परंतु विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा बाहरी गुंडों पर कार्रवाई न करते हुए उल्टा एसएफआई के 12 छात्र नेताओं पर अवैध रूप से निष्कासन कर कार्रवाई करती हैं।
आज विश्वविद्यालय के 12 छात्रों के निष्कासन को 10 दिन हो चुके हैं विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक उनसे बात करने को तैयार नहीं है अभी भी एक तरफा फैसला पर टीका हुआ है। इन छात्रों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दे रहा है जिसके चलते एस एफ आई कैंपस के अंदर लंबे समय से आंदोलन कर रही है।

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