50 घरों को खाली करवाया
शिमला : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मानसून सीजन के दौरान 32 लोगों की मौत हो गई जबकि अब तक 800 से ज्यादा पेड़ ढह चुके हैं। इनसे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। चिंता की बात यह है कि वन विभाग के पास 500 से ज्यादा खतरनाक पेड़ों को काटने के आवेदन और आ चुके हैं। पेड़ ढहने और भूस्खलन के चलते शिमला शहर में 50 से ज्यादा मकानों को खाली करवाया जा चुका है। करीब एक दर्जन मकान ढह चुके हैं।
इसमें कृष्णानगर, अनाडेल, समिट्री, फागली, नाभा, समरहिल, पंथाघाटी और विकासनगर में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। शहर में 80 से ज्यादा गाड़ियां चकनाचूर हो चुकी हैं। सर्कुलर रोड समेत नगर निगम की ज्यादातर संपर्क सड़कें टूट गई हैं। कई जगह लंबी-लंबी दरारें पड़ने से इनके ढहने का खतरा पैदा हो गया है। अकेले नगर निगम को ही शहर में 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
इस मानसून सीजन में राजधानी में अब तक 32 लोगों की जान जा चुकी है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में मानसून ने भारी तबाही मचाई है। बीते दो माह के दौरान मानसून सीजन में वर्षा से जुड़े हादसों में 376 लोगों की जान गई है और 40 लापता हैं। 349 लोग घायल हुए हैं। भूस्खलन व बाढ़ की चपेट में आने से 141 लोग मारे गए हैं, जबकि अन्य वर्षा जनित हादसों में 235 लोगों की मौत हुई।
इस मानसून सीजन में 2445 मकान, 306 दुकानें और 5384 पशुशालाएं पूरी तरह धराशायी हूई, जबकि 10504 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। बीते दो महीने में राज्य के 156 स्थानों पर भूस्खलन हुआ और 66 स्थानों पर बाढ़ आई है। मानसून सीजन में प्रदेश के सरकारी विभागों को 8604 करोड़ का नुकसान आंका गया है।
