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सिसोदिया ने पत्र लिखकर कहा कि वह जल्द जेल से बाहर आयेंगे

नई दिल्ली : मनीष सिसोदिया ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को गुरुवार को पत्र लिखकर कहा कि वह जल्द ही जेल से बाहर आएंगे। सिसोदिया ने जेल ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को एक पत्र लिखकर उम्मीद भी जतायी कि वह जल्द ही जेल से बाहर आएंगे। उन्होंने कहा,“ जल्द ही आपसे बाहर मिलूंगा। अंग्रेज को भी अपनी ताक़त का घमंड था और उन्होंने लोगों को झूठे मामलों में जेल भेजा था।”
उन्होंने कहा,“ अंग्रेजों ने सत्ता के अहंकार में डूबकर गांधी जी को भी कई बार, कई वर्षों तक जेल में डालकर रखा था, लेकिन इतिहास गवाह है कि महात्मा गांधी जैसे संत पर झूठे आरोप और तानाशाही वाले कानून लगाकर उन्हें जेल में डालने वाले अंग्रेजी राज का सूरज डूब गया था। आज गांधी जी का नाम सारी दुनिया में इतनी इज्जत से लिया जाता है। गांधी जी के नाम का सूरज कभी नहीं डूबता।”
उन्होंने कहा,“ सत्ता के नशे में चूर इन्हीं अंग्रेजों ने नेल्शन मंडेला को भी 30 साल तक जेल में डालकर रखा, लेकिन आज दुनिया जेल में डालने वाले उन तानाशाह का नहीं, बल्कि मंडेला को उनकी लड़ाई के लिए याद करती है। ये लोग बहुत बड़े लोग थे। मैं तो इनके पैरों की धूल के बराबर भी नहीं। ये लोग मेरी प्रेरणा हैं।”
श्री सिसोदिया ने कहा “पिछले एक साल में, जेल में रहते हुए, मैंने राजनीति में आने के अपने कारण पर चिंतन किया। इससे मेरा संकल्प और मजबूत हुआ। यह संकल्प है देश के हर गांव, हर कस्बे, हर शहर में रहने वाले हर बच्चे के लिए शानदार और मुफ्त शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो। आज के समय में देशों की सामाजिक मजबूती स्कूलों से तय हो रही है। वहीं, आर्थिक मजबूती कॉलेजों-यूनिवर्सिटी के स्तर से तय हो रही है। यह बात हमारे देश की राजनीति को भी समझनी होगी।”
‘आप’ नेता ने कहा,‘‘आज सिर्फ दिल्ली ही नहीं, पंजाब में भी शिक्षा क्रांति की खबरें पढ़ने को मुझे मिलती हैं। यह एक बड़ा सुखद परिवर्तन देखने को मिल रहा है। आज़ादी के दीवानों के सपनों का भारत यही तो था। भगत सिंह के सपने का भारत, गांधी-सुभाष-अंबेडकर साहब के सपनों का भारत यही तो था। आप जानते हैं कि मैंने अपना पूरा जीवन इसी सपने को पूरा करने में लगाने का संकल्प लिया है।”
उन्होंने कहा,“ आज जब हम भारत को विकसित देश बनाने की बात कर रहे हैं। विकसित देशों ने अपने स्कूल- कॉलेजों को सिर्फ पढ़ाई पूरी होने का सर्टिफिकेट बांटने के हिसाब से नहीं खड़ा किया है। विकसित देशों में स्कूल का मतलब है- बच्चे को कॉलेज आदि आगे की पढ़ाई के लिए तैयार करना। उन्हें समाज में जाति-धर्मों का मेलजोल, समानता, स्त्री- पुरुष में भेदभाव खत्म करने जैसी बातों की सीख भी दी जाती है। मुझे खुशी है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का हर कार्यकर्ता अपने आप को इसी शिक्षा क्रांति का सिपाही मानकर चल रहा है।”

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