हुकुमचंद मिल इंदौर विवाद का हुआ समाधान
भोपाल : मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के 15 दिनों में ही ठोस सकारात्मक पहल करते हुए जिस प्रकार हुकुमचंद मिल इंदौर के मजदूरों को उनका हक दिलाया है वह मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार हुकुमचंद मिल के विवाद से संबंधित 15 बिंदुओं से डॉ यादव की इस पहल के महत्व को समझा जा सकता है कि कैसे 30 वर्षों से ज्यादा समय से लंबित इस प्रकरण का समाधान हुआ। लगभग 5 हजार मजदूरों को उनके हक़ की राशि मिलेगी।
कपड़ा मिल संचालन के लिए सेठ हुकुमचंद को वर्ष 1923 में तत्कालीन शासन द्वारा 17.52 हे. भूमि लीज पर आवंटित की गई थी, जिस पर हुकुमचंद मिल संचालित थी। हुकुमचंद मिल में उच्च गुणवत्ता का कॉटन कपड़ा उत्पादित होता था, जिसका विदेशों में भी निर्यात किया जाता था। इस मिल में लगभग 7000 मजदूर एवं कर्मचारी अधिकारी कार्यरत थे। मिल का संचालन वर्ष 1991 तक चलता रहा, परन्तु वर्ष 1992 के बाद विभिन्न कारणों से मिल प्रबंधन को मिल बंद करना पड़ा।
