सिरसा : हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पराली का प्रबंधन किसान और सरकार के लिए दुविधा पैदा किए हुए है। जहां किसान पराली को अगली फसल की बुआई के लिए मजबूरी में जलाता है वहीं सरकार के नाकाफी प्रबंध पराली को जलाने से रोक नहीं पा रहे। इस दुविधापूर्ण माहौल के बीच देश के उच्चतम न्यायालय ने प्रदेश की पुलिस को हस्तक्षेप करते हुए पराली के जलाने पर रोक लगाने के लिए पाबंद किया है। शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद हरियाणा, राजस्थान, यूपी और पंजाब में पुलिस अफसरों के हाथ-पांव फूले हुए हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक सुखदेव सिंह बताते हैं कि हरियाणा के अकेले सिरसा जिला में पराली जलाने वाले 15 किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पराली न जलाने की एवज में गांवों में एक लाख्ख रुपए प्रोत्साहन राशि देने के अलावा गौशालाओं में पराली भेजने के लिए 100 रुपए प्रति ट्रॉली देने की व्यवस्था भी की है। राज्य सरकार किसानों को खड़ी पराली में अगली फसल बोने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सुपर सीडर पर 1.5 लाख रुपए जबकि बेलर पर छह लाख रुपए सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष कृषि विभाग को पराली आगजनी की 305 शिकायतें मिली थीं जबकि अबकी बार 161 मामले सामने आए हैं।
हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने बताया कि सरकार किसानों को पराली न जलाने के प्रति पाबंद तो कर रही है लेकिन सरकार विकल्प के तौर पर समुचित उपकरण मुहैया नहीं करवा पा रही। उन्होंने बताया कि
धान की फसल के बाद किसानों को गेहूं की बुआई करनी होती है। समय कम होने के कारण किसान मजबूरीवश फसल के अवशेष जलाते हैं।
सिरसा की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीप्ति गर्ग ने बताया कि शीर्ष अदालत द्वारा मिले आदेशों के बाद जिला मैजिस्ट्रेट द्वारा धारा 144 लागू कर दी गई है। कृषि विभाग व सामान्य प्रशासन के अधिकारियों द्वारा मिल रही शिकायतों के आधार पर पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए जा रहे हैं। आरोपी किसानों के खिलाफ पुलिस प्रशासन द्वारा कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
पराली : किसान व सरकार में दुविधा का माहौल
