मथुरा : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने कहा कि दीनदयाल वेटेरिनरी विश्वविद्यालय से शिक्षा लेकर निकले छात्र छात्रायें किसानों को पशुपालन के आधुनिक तरीकों से प्रेरित कर उनकी आमदनी को दोगुना करने में मदद कर सकते हैं।
विवि में दीक्षान्त समारोह काे संबोधित करते हुये श्रीमती पटेल ने सोमवार को कहा कि छात्राओं को अधिक मेडल मिले हैं। अधिक संख्या में महिलाएं भी विभिन्न क्षेत्रों के साथ इस विश्वविद्यालय में शिक्षा लेने आ रही हैं उससे लगता है कि भारत का भविष्य बहुत उज्जवल है।
उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय की ओर से जारी ऐप से किसान घर बैठे पशुओं से संबंधित सभी समस्याओं का निराकरण कर सकेंगे। कुपोषण की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुये उन्होने कहा कि घर में दूध होने के बावजूद वह न बच्चों को मिल पाता है न गर्भवती महिलाओं को मिलता है जिससे वे भी कुपोषण का शिकार हो रही हैं। इसलिए महिलाओं को पशुपालन से जोड़ना होगा अैार यह कार्य इस प्रकार के विश्वविद्यालय कर सकते हैं।
राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त यूनिवर्सिटी के डाक्टरों से महिलाओं के परिवारों में जाकर उन्हें पोषक तत्व खिलाने के लिए प्रेरित करने का भी आहवान किया और कहा कि उस शिक्षा और उस गोल्ड मेडल का कोई महत्व नही है जब तक घरों में कुपोषणयुक्त बालक का जन्म होता है।
श्रीमती पटेल ने कहा कि उन्होंने पढ़ा है कि बालक के शरीर के विभिन्न अंगों का जिस समय निर्माण होता है उस समय उनकी मां को पोषक तत्व मिलना ही चाहिए अन्यथा पैदा होने वाली संतान में कुपोषण झलकता है। जब इन कमियों को दूर करने की सोच लेकर आज उपाधि प्राप्त किये चिकित्सक जाएंगे तो कुपोषित बच्चों के जन्म लेने की संख्या कम हो सकती है।
उन्होने कहा कि वर्तमान में पशुपालन देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है। इसमें वैज्ञानिकों के प्रयास से हरित क्रांति, नीली क्रांति , गुलाबी क्रांति, की भूमिका रही है।वैज्ञानिक पद्धति के प्रयोग से पशुपालन, मत्स्यपालन, रेशम उत्पादन, मधुमक्खी पालन का उत्पादन बढ रहा है। वैज्ञानिक पद्धति से हो रहे विकास को मानव जीवन से जोड़ने की आवश्यकता है जिससे कैंसर या अन्य बीमारियों के इस प्रकार के प्रकोप को रेाका जा सके।
राज्यपाल ने कहा कि उन्हें खुशी है कि गोवंश और पशुधन की संख्या 1951 में जहां लगभग 19.7 करोड़ थी वर्ष 2019 में बढ़कर लगभग 30.3 करोड़ हो गई थी तथा वर्ष 2022 में 30.8 करोड़ हो गई। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अनेक योजनाए संचालित की जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं एवं पशुपालकों को इसकी जानकारी दी जा रही है।इससे आज महिलाएं न केवल अपने परिवार का महत्वपूर्ण अंग बन गई हैं बल्कि समाज को आगे बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को शिक्षा और व्यवसाय से समृद्ध कर आर्थिक रूप से उन्हें समर्थवान बनाया जा सकता है। महिलाओं की शिक्षा, विकास आदि के लिए कन्या सुमंगला योजना, मिशन शक्ति योजना, कस्तूरबा गांधी विद्यालय योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना,, पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना, पशुधन बीमा योजना आदि सरकार द्वारा चलाई जा रही है।
आनन्दी बेन पटेल ने कहा कि पिछले दस वर्षों में दुग्ध उत्पादन लगभग 45 प्रतिशत बढ़ा है। आज भारत दुनिया का लगभग 22 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन करता है।आज उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन करनेवाला राज्य है। डेयरी सेक्टर को और बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी है।
किसान की आय बढ़ाने में मदद करें विद्यार्थी
