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पोलियो उन्मूलन के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान में सफलता जरूरी: डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ

नयी दिल्ली : विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) के एक वरिष्ठ पोलियो महामारी विशेषज्ञ डॉ जुबैर वादूद ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान को विश्व में पोलियो वायरस के दो बाकी बचे हुए कुंड बताते हुए कहा है कि जब तक वहां इसका सफाया नहीं होता, दुनिया में इस बीमारी को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
डॉ वादूद ने पोलियो उन्मूलन के वैश्विक अभियान के लिए लंदन और न्यूयॉर्क जैसे धनी इलाकों में हाल में पोलियो वायरस मिलने की घटनाओं के निहितार्थ पर एक साक्षात्कार में कहा,’उच्च आय वाले देशों की इन जगहों पर पोलियो के इक्का दुक्का मामलों का सामने आना कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि जब तक पूरी दुनिया में यह वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और एक भी बच्चा पोलियो से प्रभावित नहीं होता तब तक ऐसे मामले कहीं भी प्रकट हो सकते हैं।’
डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर रखे इस साक्षात्कार में उन्होंने कहा,’वास्तव में इस तरह की इका दुक्का घटनाओं से वैश्विक पोलियो उन्मूलन अभियान के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है, इस अभियान की सफलता मुख्य तक पोलियो वायरस के दो बचे कुडों पर निर्भर करती है जिनमें से एक पाकिस्तान और दूसरा अफगानिस्तान है।’

उन्होंने कहा,’लंदन और न्यूयॉर्क की घटनाएं हमें चेतावनी देती है कि पोलियो कहीं भी फिर से प्रकट हो सकता, यदि इसे पूरी दुनिया से पूरी तरह खत्म नहीं किया गया।’ डॉ वादूद ने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान सामूहिक प्रयास के लिए दो शीर्ष प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि हाल के समय में इन दोनों देशों में पोलियो उन्मूलन के काम में प्रगति जरूर हुई है। पाकिस्तान में 2022 में पोलियो के मामले बढ़े हैं पर नए मामलों का क्षेत्र सीमित हुआ है। अफगानिस्तान में 30 लाख ऐसे बच्चों को अब नियमित पोलियो वैक्सीन मिलने लगी है जिन्हें पहले नहीं मिलती थी।

डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ ने कहा कि जब तक अफगानिस्तान और पाकिस्तान में पोलियो वायरस को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता इसके प्रसार का खतरा बना रहेगा। उन्होंने अमेरिका और इंग्लैंड में पोलियो वायरस मिलने के बाद वहां के अधिकारियों द्वारा खासकर अधिक जोखिम वाली आबादी को इससे बचाने के लिए उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि हाल में अमेरिका और ब्रिटेन में पोलियो वायरस के मिलने से विश्व में इसको लेकर चिंता बढ़ी है।

हाल में लंदन में सीवेज प्रणाली में पोलिया वायरस मिला और न्यूयार्क में सीवेज प्रणाली के साथ साथ पोलियो संक्रमण का भी एक मामला मिला है। डा वादूद ने कहा कि पोलियो वायरस को जब तक दुनिया में हर स्थान पर पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, इसके फैलने का खतरा बना रहेगा। यह जनसंख्या के आव्रजन-प्रवर्जन इस तरह यंत्र तंत्र मिलता रहेगा। पहले यह दक्षिण पूर्व अफ्रीका में दिखा था और अब यह उच्च आय वाली जगहों दिखा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पोलियो वायरस खत्म करने की चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की क्षमता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। आयुर्विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता स्थापित हो चुकी है। पोलियो निमूलन के लिए कमी है तो सामाजिक और राजनीतिक इच्छा शक्ति की। उन्होंने कहा,’भविष्य में अगर विफला के लिए उंगली उठती भी है तो वह आयुर्विज्ञान और प्रौद्योगिकी की क्षमता की ओर नहीं उठ सकती है। उंगली उठेगी तो सामाजिक और राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव की ओर उठेगी’
उन्होंने कहा कि यह बड़ी खुशी की बात है जी7, जी8 और विश्व स्वास्थ्य महासभा जैसे मंचों ने पोलियो निमूलन के अवसरों को मान्यता दी है पर ये अवसर आने वाले हर समय के लिए उपलब्ध हो यह जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस अवसर का तेजी से उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोटरी जैसी संस्थाएं इस दिशा में प्रयास बढ़ा रही है। जर्मनी अन्य देशों और मंचों के साथ अगले माह दानदाताओं का सम्मेलन करने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पोलियो उन्मूलन की सफलता का अर्थ है कि दुनिया में कोई बच्चा कभी भी पोलियो ग्रस्त नहीं होगा, पर विफल दुनिया में हजारों हजार बच्चों को इससे ग्रसित करेगी। इस तरह की विफलता के बड़े गंभीर अर्थिक दुष्परिणाम होंगे।

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