नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने 1991 के राजीव गांधी हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एस नलिनी और आर पी रविचंद्रन की याचिकाओं पर सोमवार को केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने याचिकाओं पर केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 14 अक्टूबर मुकर्रर की।
नलिनी और रविचंद्रन ने शीर्ष अदालत द्वारा एक अन्य दोषी ए जी पेरारिवलन की रिहाई का हवाला देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में अपनी याचिकाएं दायर की थी, जो खारिज कर दी गई थीं। उच्च न्यायालय द्वारा 17 जून को याचिकाओं पर विचार करने से इनकार के बाद दोनों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
उच्च न्यायालय ने याचिकाओं पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा था कि वह शीर्ष अदालत द्वारा पारित समान आदेश पारित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत ने 18 मई को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उम्र कैद की सजा काट रहे पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया था।
पेरारिवलन श्री गांधी की हत्या के दोषियों में शामिल है। शीर्ष अदालत ने तब कई कारकों को ध्यान में रखा था। मसलन, पेरारिवलन के जेल में कैद और पैरोल की अवधि, पुरानी बीमारियों, जेल में हासिल की गई उनकी शैक्षणिक योग्यता और ढाई साल के बाद अनुच्छेद 161 के तहत रिहाई के लिए उनकी याचिका की लंबित रहने के दौरान उनका संतोषजनक आचरण। उनकी सजा में छूट के लिए राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश।
सुप्रीम कोर्ट ने नलिनी, रविचंद्रन की रिहाई की याचिका पर केंद्र, तमिलनाडु सरकार को जारी किया नोटिस
