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सांसदों का निलंबन तानाशाही

नई दिल्ली : मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में सुरक्षा को लेकर सवाल पूछने पर पार्टी सांसदों के निलंबन को अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि सुरक्षा में चूक का मामला गंभीर है और इस मुद्देे को संसद में उठाने के कारण सांसदों का निलम्बन तानाशाही रवैया है। खड़गे ने कहा “राष्ट्रीय सुरक्षा और हमारे लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद की सुरक्षा को खतरे में डालने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब इस मुद्दे को लेकर बात करने वालों को ही सजा दे रही है।

संसद में हुई गंभीर सुरक्षा चूक को लेकर चर्चा करने की बात करने वाले विपक्ष के 15 सांसदों को सरकार ने संसद से निलंबित कर दिया, लेकिन सही मायने में यह लोकतंत्र का निलंबन हुआ है। जिन सांसदों का निलम्बन हुआ है सरकार बताए उनका अपराध क्या है। क्या गृहमंत्री से सदन में बयान देने का आग्रह करना अपराध है या गंभीर सुरक्षा चूक पर चर्चा कराना अपराध है। सवाल है कि भाजपा की सरकार में व्यवस्था का जो आलम बना है क्या इसमें तानाशाही नहीं झलकती है।”
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 13 दिसंबर को संसद की सुरक्षा में जो चूक हुई उसके खिलाफ कांग्रेस के सांसदों ने आवाज उठाई तो उन्हें आज निलंबित कर दिया गया। उन्होंने कहा,“संसद में हुई सुरक्षा चूक को लेकर सरकार से जवाब मांगने के लिए विपक्षी सांसदों को निलंबित करना गलत और अलोकतांत्रिक है।

एक तरफ जवाबदेही की मांग करने पर सांसदों को निलंबित किया जाता है और दूसरी तरफ उपद्रवियों के प्रवेश में मदद करने वाले भाजपा सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।” उन्होंने सरकार के इस कदम को लोकतंत्र की हत्या करार दिया और कहा ,“यह लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा सरकार ने संसद को रबर स्टाम्प बनाकर रख दिया है। अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया दिखावे के लिए भी नहीं बची है।”

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