कोलकाता : सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि क्षेत्रीय पार्टी टीएमसी जानबूझकर पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र को खत्म कर रही है। सुवेंदु अधिकारी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा,“पहले उन्होंने न्यायपालिका पर हमला किया। कोई भी प्रतिकूल निर्णय पर टीएमसे के तीसरे दर्जे के तथाकथित प्रवक्ता माननीय न्यायाधीश के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां करेंगे। उनके कोर्ट रूम को बलपूर्वक अवरुद्ध कर दिया जाएगा और वादियों को प्रवेश करने से रोक दिया जाएगा। माननीय न्यायाधीश की निंदा करने वाले पोस्टर कोलकाता की दीवारों पर लगाए जाएंगे, लेकिन कोलकाता पुलिस, जिसे कभी अपराधों को सुलझाने में अन्य की तुलना में बेहतर माना जाता था; उन्हें इनका सुराग नहीं मिलेगा।”
उन्होंने कहा कि अब इस घृणित क्षेत्रीय पार्टी के एमडी, जो सोचते हैं कि पश्चिम बंगाल उनकी निजी जागीर है और वह इस राज्य के ज़मींदार हैं, ने संवैधानिक प्राधिकरण पर अपनी बुरी नज़र डाल दी है। राजभवन की सीमा से 150 मीटर की दूरी तक धारा 144 लागू की जाएगी।
नंदीग्राम में हुए चुनाव में तृणमूल प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने वाले विधायक ने कहा कि उन्होंने न केवल पुलिस के साथ मिलकर धारा 144 लागू क्षेत्र में अपना मार्च निकालकर इसका उल्लंघन किया है, बल्कि अब साइट पर भी डेरा डाल दिया है। माननीय राज्यपाल की सुरक्षा, जो राज्य के संवैधानिक प्रमुख है, उसे घटिया राजनीतिक नाटक के लिए खतरे में डाला जा रहा है। पुलिस इसे आसान बना रही है।
उन्होंने कहा कि मीडिया को हमेशा पश्चिम बंगाल में निरंकुश शासन और सत्तारूढ़ पार्टी के गुस्से का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से वे लोग जो कठिन सवाल पूछते हैं और पश्चिम बंगाल में अव्यवस्थित स्थिति को कवर करते हैं, वे लगातार खामियाजा भुगतते हैं।
इस बीच, पश्चिम बंगाल को कथित केंद्रीय बकाया राशि जारी करने की मांग को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में राजभवन के सामने शुक्रवार को दूसरे दिन भी धरना दिया गया। सत्तारूढ़ पार्टी ने बल देकर कहा कि उसके सदस्य तब तक एक इंच भी नहीं हटेंगे जब तक कि राज्यपाल सी वी आनंद बोस उनसे मुलाकात नहीं करते।
दो अक्टूबर से तीन दिनों तक नयी दिल्ली में धरना देने के बाद श्री बनर्जी ने गुरुवार से राजभवन गेट के सामने धरना प्रदर्शन का नेतृत्व किया। सूत्रों ने कहा कि राज्यपाल ने कल बाढ़ प्रभावित उत्तरी बंगाल के जिलों का दौरा किया और वह वहां से नयी दिल्ली चले गए। एआईटीसी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में हमारा प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल के हमसे मिलने तक अपना अनिश्चितकालीन धरना जारी रखेगा।
इस बीच, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा के लिए धन की कोई बाधा नहीं है और दोहराया कि केंद्रीय निर्देशों का पालन न करने के कारण पश्चिम बंगाल के लिए धन जारी नहीं किया गया। गुरुवार को मंत्रालय के बयान में कहा गया कि केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण मनरेगा अधिनियम, 2005 की धारा 27 के प्रावधान के अनुसार नौ मार्च, 2022 से पश्चिम बंगाल राज्य की धनराशि रोक दी गई है।
केंद्रीय मंत्रालय ने कहा कि चार अक्टूबर तक इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपये के बजट में से 56,105.69 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। कार्यक्रम को लागू करने के लिए धन की उपलब्धता कोई बाधा नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि मनरेगा एक मांग आधारित मजदूरी रोजगार कार्यक्रम है और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को कोष जारी करना एक सतत प्रक्रिया है और केंद्र सरकार काम की मांग को ध्यान में रखते हुए धन उपलब्ध कराती है।
मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में चार अक्टूबर तक 15 दिन के भीतर 99.12 प्रतिशत वेतन आदेश जारी किए जा चुके हैं।
इसने कहा कि मजदूरी के भुगतान में विलंब राज्यों में कार्यान्वयन के मुद्दों के कारण होता है जिसमें अपर्याप्त कर्मचारी, माप, डेटा एंट्री, मजदूरी सूची का निर्माण, निधि अंतरण आदेश (एफटीओ) आदि शामिल हैं। प्रावधानों के अनुसार मजदूरी भुगतान में देरी होने मामले में, लाभार्थी मुआवजे का हकदार है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि किसी परिवार का जॉब कार्ड केवल कुछ विशिष्ट शर्तों में हटाया जा सकता है, लेकिन आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (एपीबीएस) के कारण नहीं। केंद्रीय मंत्रालय ने कहा कि जॉब कार्डों को अपडेट करना/हटाना राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाने वाला एक नियमित कार्य है। फर्जी जॉब कार्ड, गलत जॉब कार्ड/डुप्लीकेट जॉब कार्ड/काम करने के लिए अनिच्छुक परिवार/ग्राम पंचायत से स्थायी रूप से स्थानांतरित परिवार/जॉब कार्ड में एकल व्यक्ति होने और उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई हो, उस स्थिति में ही जॉब कार्ड को हटाया जा सकता है।
सुवेंदु ने तृणमूल पर साधा निशाना
