नई दिल्ली : टाटा टी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जागो रे अभियान का नया संस्करण पेश किया है। इस पहल पर टिप्पणी करते हुए टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के पैकेज्ड बेवरेजेज (भारत और दक्षिण एशिया) के अध्यक्ष पुनीत दास ने कहा कि वर्तमान की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक-जलवायु परिवर्तन के थीम पर जागो रे का यह अभियान आधारित है। जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इस वैश्विक संकट का प्रभाव हमारी पृथ्वी पर असर डाल रहा है जो हमारे बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा हैI
उन्होंने कहा कि 2007 से टाटा टी का जागो रे अभियान वास्तविक परिवर्तन लाने और पूरे समाज के लाभ के लिए प्रभावी उपाय लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भ्रष्टाचार, चुनाव, महिला सशक्तिकरण, कोविड-19 जैसे विभिन्न मुद्दों पर जागरुकता पैदा करते हुए जागो रे ने सामाजिक जिम्मेदारी को एक नया अर्थ दिया है। टाटा टी ने इस मुद्दे पर सामाजिक जागरूकता पैदा करने के लिए अपने मंच का उपयोग किया है और यह महसूस किया है कि जलवायु परिवर्तन के बारे में सक्रिय होना कितना जरूरी और महत्वपूर्ण है।
दास ने कहा कि नए अभियान में, टाटा टी जागो रे ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के संदेश को माता-पिता के लिए अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण बनाने के लिए लोकप्रिय नर्सरी राइम्स का उपयोग किया है। इसमें दिखाया गया है कि अगर हम आज कदम नहीं बढ़ाएंगे तो भविष्य में हमारे समय के लोकप्रिय गीत और कविताएं कितनी अलग हो सकती हैं। इसमें जैक एंड जिल, मछली जल की रानी, ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार, रेन रेन गो अवे को अलग रूपों में प्रस्तुत किया गया है। फिल्म दर्शाती है कि वर्तमान ज्वलंत वास्तविकता और हमारी उपेक्षा और निष्क्रियता के कारण हमारे बच्चों की दुनिया का कितना नुकसान होगा।
दास ने कहा, “टाटा टी जागो रे हमेशा समय की मुख्य सामाजिक मुद्दों पर समाज की संघटित संवेदनशीलता बढ़ाने पर विश्वास रखता था और दुनिया के भविष्य के लिए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई की जरूरत से अधिक कुछ नहीं है। वैसे तो जलवायु परिवर्तन और इसके नकारात्मक प्रभावों पर लंबे समय से चर्चा की जा रही है, पर यह समझना महत्वपूर्ण है कि हमारे बच्चों को इससे कितना बड़ा खतरा उठाना पड़ सकता है।
इस वर्ष हम लोकप्रिय नर्सरी राइम्स के ज़रिए दिखा रहे हैं कि अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो हमारे बच्चों का बचपन हमारे बचपन से बहुत अलग दिख सकता है! हमें उम्मीद है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या इतनी व्यक्तिगत है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार और आदतों में बदलाव ला सकता है और समग्र रूप से समाज में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।”
