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प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण देने में शिक्षक भी बनेंगे संवाहक

गांधीनगर : आचार्य देवव्रत ने शनिवार को यहां कहा कि किसानों को प्राकृतिक कृषि का प्रशिक्षण देने में शिक्षक भी संवाहक बनेंगे। राज्य के सभी जिलों में विशेष शिक्षकों के लिए प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित किये जाएंगे। देवव्रत के साथ राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. कुबेरभाई डिंडोर ने राजभवन में बैठक की और जनकल्याण के लिए अनिवार्य प्राकृतिक कृषि पद्धति का दायरा बढ़ाने में शिक्षा विभाग के सहयोग पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ-गुजरात, प्राथमिक शिक्षक संघ-गुजरात और माध्यमिक, उच्च माध्यमिक एवं प्रशासनिक संघ-गुजरात के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कई शिक्षक शिक्षा के अलावा कृषि कार्य से भी जुड़े हुए हैं। कई शिक्षक खेती भी करते हैं। अगर कृषि से जुड़े शिक्षक प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाएं तो वह अन्य किसानों के लिए अनुकरणीय बनेंगे। इतना ही नहीं, वह दूसरे किसानों को भी ठीक से प्रशिक्षित कर सकते हैं। साथ ही विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती करने के तरीकों के बारे में भी सही जानकारी दे सकते हैं।
डॉ. श्री कुबेरभाई डिंडोर ने व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम में प्राकृतिक खेती को चरणबद्ध रूप से वोकेशनल शिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल करने, स्कूलों में प्राथमिक-माध्यमिक स्तर पर प्राकृतिक कृषि पर निबंध, लेखन प्रतियोगिताएं, क्विज़, वक्तृत्व प्रतियोगिताएं आयोजित करने पर भी परामर्श किया।
राज्यपाल ने जिला स्तर पर पहुंचकर सभी शिक्षकों को प्राकृतिक कृषि का प्रशिक्षण देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से पैदा होने वाले कृषि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। समाज के सभी वर्गों को पर्यावरण, मिट्टी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जैविक कृषि के महत्व के बारे में जागरूक होना पड़ेगा। किसानों को प्राकृतिक कृषि का प्रशिक्षण देने में शिक्षक भी संवाहक बनेंगे। राज्य के सभी जिलों में विशेष शिक्षकों के लिए प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित किये जाएंगे। राज्यपाल शिक्षकों को सम्बोधित भी करेंगे। इस बैठक में दिग्विजयसिंह जाडेजा, सुखदेवसिंह जाडेजा, भीखाभाई पटेल, मितेशभाई भट्ट, अश्विनभाई पटेल, विनोदभाई पटेल, शैलेशभाई पटेल, रमेशभाई चौधरी और प्राकृतिक कृषि संयोजक भी उपस्थित रहे।

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