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प्राकृतिक कृषि का उद्देश्य खर्च घटे, उत्पादन बढ़े

दाहोद : आचार्य देवव्रत ने शनिवार को यहां कहा कि किसानों का खर्च घटे, उत्पादन बढ़े और उपज का उचित भाव मिले , यही प्राकृतिक कृषि का उद्देश्य है। देवव्रत की अध्यक्षता में दाहोद जिले के सालिया धाम, कबीर आश्रम में श्रीमद् ब्रह्मनिरुपण ज्ञानयज्ञ कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक कृषि परिसंवाद का आयोजन किया गया। किसानों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक कृषि के साथ जुड़कर पोषक अनाज-फसल मिले, किसानों की आय बढ़े, लोग तंदुरुस्त बने, इसके लिए प्रयत्न किए जा रहे हैं और अभियान चलाया जा रहा है। बढ़ते जा रहे ग्लोबल वार्मिंग के नकारात्मक प्रभाव, कृषि उत्पादन और स्वास्थ्यप्रद जीवन के लिए प्राकृतिक कृषि ही एकमात्र असरदार उपाय है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह जंगल के वृक्षों को पोषण मिलता है, वहां किसी भी प्रकार की खाद के बगैर फल आ जाते हैं। प्राकृतिक कृषि में भी जीवामृत और घनजीवामृत आधारित कुदरती पद्धतियों द्वारा खेती तो पोषणयुक्त बनती ही है, किसानों का खर्च भी शून्य हो जाता है। उन्होंने यूनेस्को से आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अगर रासायनिक खाद का उपयोग घटाया नहीं गया , तो आगामी 40 वर्ष में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के कारण जमीन पूरी तरह से अनुपजाऊ
बन जाएगी। विदेश से मंगवाए जा रहे यूरिया और अन्य रासायनिक खाद खरीदने में देश की पूंजी खर्च होती है, जबकि प्राकृतिक कृषि से जमीन के पोषक तत्व बने रहते हैं और बरसाती जल के जमीन में उतरने के कारण जमीन का जल
स्तर भी ऊपर आता है।
राज्यपाल ने कहा कि देसी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु होते हैं। गाय के गोबर और गौमूत्र आधारित प्राकृतिक कृषि के कारण प्रथम वर्ष से ही सम्पूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है। इतना ही नहीं किसानों का खर्च शून्य होने के कारण उनकी आय दोगुनी होने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प भी साकार किया जा सकेगा। इसके लिए उन्होंने केंचुआ आधारित कुदरती खाद बनाने की विधि, जीवामृत- घनजीवामृत, आच्छादन की भी विस्तृत जानकारी दी। प्राकृतिक खेती करने से खेत में केंचुए का दायरा बढ़ता है, जिससे नेचरल हार्वेस्टिंग सिस्टम खड़ा होता है।
राज्य में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले
चार वर्ष के दौरान राज्य में 7.75 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनायी है। प्रति माह 3.30 लाख लोगों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग दी जाती है। गुजरात की भूमि को आने वाले दो वर्ष में जहरमुक्त करेंगे। प्राकृतिक उत्पादों को बेचने के लिए प्रत्येक तहसील और जिला स्तर पर मार्केट की व्यवस्था खड़ी की गई है। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती करने वाली महिला किसानों के साथ भी संवाद किया गया जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
दाहोद जिले में कुल दो लाख, 15 हजार हेक्टेयर में खेती की जाती है, जिसमें मुख्य तौर पर मक्का, सोयाबीन, चना
और गेहूं जैसी फसलें उगाई जाती हैं। सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी करने का एक अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत जिला खेतीबाड़ी और आत्मा विभाग दाहोद द्वारा भी प्राकृतिक कृषि का दायरा बढ़ाने के लिए विभिन्न शिविरों का आयोजन किया गया है। दाहोद जिले में 28,055 एकड़ क्षेत्र में कुल 41,679 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। सरकार की गाय निभाव योजना के अंतर्गत दाहोद में 15,221 किसानों को वित्तीय सहायता का लाभ दिया दिया गया है।
कबीर आश्रम, सालिया में अभी सेवायज्ञ चल रहा है जिसके अंतर्गत इस प्राकृतिक कृषि परिसंवाद का आयोजन किया
गया। इस आश्रम में गौशाला तथा आरोग्य धाम द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। प्राकृतिक कृषि के लिए आवश्यक गाय आधारित खाद बनायी जा रही है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने प्राक्रतिक कृषि आधारित शॉर्टफिल्म निहारी। कबीर आश्रम के महंत ऋषिकेशदास ने स्वागत विधि की जबकि महंत कमलकिशोर दास ने सबका आभार व्यक्त किया।
इस प्राकृतिक कृषि परिसंवाद कार्यक्रम में राज्य के पंचायत और कृषि राज्यमंत्री बचुभाई खाबड, देवगढ़ बारिया एपीएमसी. के चेयरमेन भरतभाई भरवाड, प्राकृतिक कृषि के राज्य संयोजक प्रफुल्लभाई सेंजलिया, आत्मा के निदेशक पीएस रबारी, कबीर आश्रम के महंत ऋषिकेश दास, रोहित दास तथा प्राकृतिक कृषि के साथ जुड़े किसान और महानुभाव उपस्थित थे।

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