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यमुना के जलस्तर बढ़ने की रफ्तार थमी

मथुरा : मथुरा में सोमवार सुबह से यमुना के जलस्तर के बढ़ने की रफ्तार थम सी गई है। पिछले आठ घंटे में नदी के जलस्तर में मात्र छह सेन्टीमीटर की ही बढत हुई है। ताजेवाला हेडवक्र्स से सुबह आठ बजे 46612 क्यूसेक एवं ओखला बैराज से 92035 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था तथा यमुना का जलस्तर एक मीटर 22 सेन्टीमीटर था लेकिन आठ बजे ही गोकुल बैराज से 1,44,871 क्यूसेक पानी आगरा की ओर छोड़ने के कारण यमुना लगभग स्थिर हालत में पहुंच गई है।

अपरान्ह चार बजे प्रयाग घाट पर जलस्तर एक मीटर 30 सेन्टीमीटर ही था। आज सुबह ओखला बैराज से 92035 क्यूसेक तथा ताजेवाला हेडवक्र्स से 46612 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। ताजेवाला से 40346 क्यूसेक पानी शाम को छोड़ा गया था तथा ओखला पर पानी लगभग स्थिर है।
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बताया कि कहीं से किसी प्रकार की जनहानि अथवा पशुहानि होने का सूचना नही है। यमुना में जलस्तर लगभग स्थिर बनाने से अभी तक केवल आठ गांव ही बाढ़ की चपेट में पूरी तरह आए हैं जबकि यमुना किनारे 120 गांव बसे हुए हैं। जिलाधिकारी के अनुसार अब तक लगभग 1300 लोग बाढ से निकाले गए हैं।
उन्होंने बताया कि मोटरबोट समेत 78 नावें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगाई गई हैं। मांट पानीगांव की सड़क पर पानी भर जाने से इस मार्ग पर यातायात रोक दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 69 ट्रांसफार्मर बन्द कर दिए गए हैं जिसके कारण इनसे जुड़ी कालोनियों में बिजली की आपूर्ति बन्द है। इन कालोनियों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है मगर टीले पर बसे चैबियापाड़ा क्षेत्र में गलियां सकरी होने के कारण वहां वैकल्पिक व्यवस्था से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
जिलाधिकारी के अनुसार वृन्दावन में केसी घाट से चामुण्डा तक का परिक्रमा मार्ग जलमग्न है जिसके कारण वहां परिक्रमा रोक दी गई है तथा वर्तमान में परिक्रमा मार्ग में भी नाव चल रही है। एनडीआरएफ की टीमे बाढ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में लगी हुई हैं। भोजन , दवा आदि का प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक शरणालय में डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को लगा दिया गया है। शरणालयों में जरूरत से अधिक भोजन लेने वालों से कहा गया है कि वे आवश्यकता के अनुरूप ही भोजन लें क्योंकि खाद्य पदार्थों की कमी नही है।
नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि बहुत समझाने के बावजूद बाढ प्रभावित क्षेत्र में फंसे कुछ लोग घर छोड़ने को तैयार नही हैं तथा उनको समझाने के लिए क्षेत्र के समाजसेवियों की मदद ली जा रही है। वाइल्ड लाइफ एसओएस के कम्यूनिकेशन्स आफिसर श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि एशिया के एक मात्र हाथी अस्पताल की ओर बहुत धीरे पानी बढ रहा है जिसके कारण वहां चौकसी बरती जा रही है लेकिन फरह के भालू सेन्टर एवं हाथी सेन्टर में बाढ़ का अभी कोई खतरा नही है।

एसडीएम मांट प्रीति जैन ने बताया कि जांघौली गांव की गोशाला से 150 गायों को बाढ प्रभावित होने के कारण निकाल लिया गया है तथा चिकरौली गांव से 30 गायों को रेस्क्यू किया गया है। तहसीलदार को खादर में बनी एक गोशाला की गायों को रेस्क्यू करने के लिए भेज दिया गया है।

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