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प्रधानमंत्री ने नौ साल में बेटियों के उत्थान में युग प्रवर्तक की तरह किया काम

  • राजा राममोहन राय की तरह महिला उत्थान के लिए प्रयासरत हैं मोदी
  • आधी आबादी को प्रधानमंत्री मोदी ने दी नई उड़ान, दिखाया रास्ता

स्वाती सिंह

26 मई 2014 का वह दिन तो सबको याद होगा, जब एक पार्टी का अहम जनता ने तोड़ दिया था और एक प्रधान सेवक के रूप में आम जन के दुख-दर्द को समझने वाला प्रधानसेवक के रूप में संसद का नेतृत्व करने पहुंचे, वह थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। नरेंद्र मोदी ने संसद का सास्टांग प्रणाम किये और तब से लेकर आज नौ साल पूरे हो गये, लेकिन जनता के हित के लिए चौबिस घंटे जनता को दंडवत प्रणाम कर रहे हैं। उनके हर फैसले जनता के हित के लिए, पूरे विश्व में जनता के सम्मान के लिए, गरीब कल्याण के लिए होते हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो भी कहा, जनता ने विश्वास किया और उस विश्वास को प्रधानमंत्री ने कायम रखा।
वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर वर्ग के लिए काम किया है। उनके कामों को देखने पर एक महाकाव्य तैयार हो जाएगा, लेकिन मैं एक महिला होने के नाते उनके सिर्फ महिला हित के प्रमुख कामों को ही बताएं तो एक किताब तैयार हो सकती है।
सबसे प्रमुख तीन तलाक को लेकर अध्यादेश जारी करना रहा। सबको याद है, तीन तलाक के बारे में कानून तो दूर किसी राजनीतिक दल की हिम्मत नहीं थी कि उसके बारे में बात भी कर सके, लेकिन वोट बैंक की चिंता किये बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वर्ग विशेष की आधी आबादी को सितंबर 2018 में तीन तलाक की बेड़ियों को अध्यादेश लाकर समाप्त कर दिया। इस कुप्रथा के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैसे ही साहस दिखाया, जैसे कभी राजा राममोहन राय ने हिंदू धर्म में चल रही सती प्रथा के खिलाफ दिखाई थी।
यह भी कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस वर्ग का हितैषी बनने का कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल ढ़ोंग करते हैं, उसकी आधी आबादी को ही कैद खाने की तरह जीवन-बसर करने को मजबूर कर दिया था। उसको डर था कि कहीं हमारा वोट बैंक ही हमसे न खिसक जाय, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश हीत की बात सोचते हैं, कभी भी वोट बैंक की राजनीति नहीं करते। यही कारण है कि उन्होंने 21 फरवरी 2019 को तीन तलाक पर अध्यादेश ला दिया। उसके तहत अब विदेश में बैठकर तलाक कहने मात्र से शादी कैंसिल नहीं मानी जा सकती। उस विधेयक ने मुस्लिम महिलाओं को अधिकार दे दिया, अपने हिसाब से जीने का।
इस कानून के तहत मुताबिक यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक पर बहस का जवाब देते हुए कहा था “हजारों साल पहले पैगंबर ने भी इस पर सख्ती से पाबंदी लगाई थी और उनके जिस बंदे ने ऐसा किया, उससे कहा कि वह अपनी पत्नी को वापस ले। यहां भी लोग कह रहे हैं कि तीन तलाक गलत है, लेकिन इसे चलने दो। इसका मतलब यह है कि तीन तलाक गलत है, लेकिन सब कुछ ऐसे ही चलने दो।”
वहीं अब वह इतिहास की बात हो गयी, जब कभी माताएं-बहनों को शौचालय जाने के लिए शाम का इंतजार करना पड़ता था। यदि तबियत खराब हो तो गरीब परिवारों में बीमारी से ज्यादा टायलट की समस्या आती थी। पीएम मोदी के कार्यकाल में जनता के स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों और शहरों में 12 करोड़ शौचालय बने। जितने यहां शौचालय बनाये गये, उतना कई देशों की जनसंख्या नही हैं। आज हर गांव, हर घर में शौचालय मिलेगा। माताएं-बहने इससे बहुत शुकुन महसूस करती हैं। इसके साथ ही स्वच्छता के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है।
बेटियां बाप के सिर पर बोझ न बनें, इसके लिए प्रधानमंत्री ने सुकन्या समृद्ध योजना शुरू की। 2015 में शुरू की इस योजना पर सरकार 7.6 प्रतिशत की दर से प्रति वर्ष व्याज देती है। इसे 250 के निवेश से शुरू किया जा सकता है। इसकी लोगों के बीच कितना पापुलर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके तहत अब तक तीन करोड़ से ज्यादा पूरे देश में एकाउंट खोले जा चुके हैं। इसके तहत प्रति वर्ष लगभग 33 लाख एकाउंट खोले जाते हैं। इस योजना के तहत टैक्स छूट में भी लाभ मिलता है। उन्होंने काम करने वाली महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना शुरू की। इसके लिए तहत लाभार्थी को गर्भावस्था के पंजीकरण के समय एक हजार रुपये, गर्भावस्था के छह माह पर दो हजार रुपये, बच्चे के जन्म पर दो हजार रूपये दिया जाता है। यह राशि भले ही ऊंचे महलों में रहने वाले लोगों को छोटी लगे, लेकिन उनके लिए बहुत ज्यादा है, जो सौ रूपये के खर्च पर अपने बच्चों को टिका लगवाने में भी हिचकते हैं। इसके अलावा बेटियां काम शुरू करें, इसके लिए बिना कोई गारंटी मांगे ही मुद्रा लोन योजना शुरू की। तीनों सेनाओं में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटियों के लिए दरवाजे खोल दिये।
(लेखिका- पूर्व मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं।)

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