नई दिल्ली : केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने शनिवार को कहा कि दिव्यांगजन उच्च मूल्यवान मानव संसाधन हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय विकास एजेंडा में दिव्यांग व्यक्तियों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। डॉ कुमार ने यहां अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर दिव्यांग जनों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करने के एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांग जनों के लिए सम्मानीय जीवन यापन का उचित परिवेश उपलब्ध कराने के लिए सरकारी निरंतर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांग जनों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने दिन दिव्यांग जनों के कल्याण से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदर्श वाक्य ‘समावेशी विकास, सबका विकास और सबका विश्वास’ है। सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों का अधिकार अधिनियम, 2016 बनाया है जो अप्रैल 2017 से प्रभावी हुआ। अधिनियम दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सरकारी नौकरियों में चार प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि सुगम्य भारत अभियान (एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन) की शुरुआत दिव्यांग व्यक्तियों को सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करने के लिए की गई थी ताकि वे गरिमा के साथ एक सार्थक जीवन जी सकें। इस अभियान के तहत सार्वजनिक भवनों, परिवहन व्यवस्था और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को शामिल किया गया है। आम लोगों की सुगमता से संबंधित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन समस्याओं को जल्द से जल्द और व्यवस्थित तरीके से हल करने के लिए एक मोबाइल ऐप विकसित किया है।
सरकार ने श्रवण-बाधित व्यक्तियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और भारत में सांकेतिक भाषा बनाने के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की है। संस्थान, अन्य कार्यों के साथ, सांकेतिक भाषा के शब्दकोशों को लगातार तैयार कर रहा है, जिसमें अब तक 10,000 से अधिक शब्द शामिल हैं।
डॉ कुमार ने कहा कि सरकार विकलांग व्यक्तियों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के उद्देश्य से एक अद्वितीय विकलांगता पहचान पत्र परियोजना लागू कर रही है। अभी तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 713 जिलों में 84 लाख से अधिक यूडीआईडी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। सरकार मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विकलांग खेल केंद्र और सीहोर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान भी स्थापित कर रही है। उन्होंने ‘दिव्य कला शक्ति’ का उल्लेख किया, जिसका आयोजन दिव्यांग युवाओं और बच्चों की प्रतिभा और कौशल दिखाने के लिए किया जा रहा है।
