नई दिल्ली : द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को पहली बार नये संसद भवन में प्रवेश किया और संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए इस भवन को देश की भव्यता और समृद्धि का प्रतीक बताया। मुर्मु ने संयुक्त सदन में अपने अभिभाषण में कहा, “इस नए संसद भवन में यह मेरा पहला संबोधन है। आज़ादी के अमृतकाल की शुरुआत में यह भव्य भवन बना है और यहां ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की महक भी है। भारत की सभ्यता और संस्कृति की चेतना भी है।”
उन्होंने कहा, “इस भवन में, हमारी लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के सम्मान का प्रण भी है और साथ ही 21वीं सदी के नए भारत के लिए नई परंपराओं के निर्माण का संकल्प भी है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस नए भवन में नीतियों पर सार्थक संवाद होगा।”
राष्ट्रपति ने देशवासियों को अमृतकाल की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “ऐसी नीतियां बनेंगी जो आज़ादी के अमृतकाल में विकसित भारत का निर्माण करेंगी। मैं आप सभी को अपनी शुभकामनाएं देती हूं। हमारे संविधान के लागू होने का यह 75वां वर्ष है और इसी कालखंड में आज़ादी के 75 वर्ष का उत्सव ‘अमृत महोत्सव’ भी संपन्न हुआ है। इस दौरान देश भर में अनेक कार्यक्रम हुए। देश ने अपने गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया और 75 साल बाद युवा पीढ़ी ने फिर स्वतन्त्रता संग्राम के उस कालखंड को जिया।”
नये संसद भवन में है ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की महक
