गौरवशाली भारत

देश की उम्मीद ‎‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎ ‎‎

बंगाल में लोकतंत्र नहीं, हिंसा का मजबूत तंत्र

नई दिल्ली : कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में वास्तविक लोकतंत्र नहीं बल्कि हिंसा का मजबूत तंत्र है जिसे भाजपा ही मिटा सकती है। भाजपा में छह साल से अधिक समय तक पश्चिम बंगाल के प्रभारी रहे विजयवर्गीय ने यहां प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेले में राज्य की चुनावी हिंसा पर वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी की पुस्तक ‘भय आतंक का चुनाव’ का लोकार्पण के अवसर पर अपने संबोधन में कही। यश प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में आईटीवी के संपादकीय निदेशक आलोक मेहता और पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर भी उपस्थित थे।
विजयवर्गीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल के समाज को यह समझना पड़ेगा कि अच्छी राजनीति और सच्चे लोकतंत्र के मायने क्या हैं। राज्य में लोकतंत्र नहीं है और जो है, वह है हिंसा का तंत्र। उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव के लिए संविधान लागू नहीं किया जाता है। राज्य में बाहर से घुसपैठिए आ रहे हैं और अब तो वे हिन्दू नामों से आधार कार्ड बनवा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव में राजनीतिक प्रतिद्वंदिता शत्रुता में बदल गई है और खुद उनके ऊपर दुष्कर्म एवं बाल तस्करी के आरोपों में मुकदमे लाद दिये गये हैं।
भाजपा महासचिव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मीडिया में भय-आतंक के माहौल के बावजूद वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी ने जिस निर्भीकता के साथ जमीन पर जा कर सच को देखा और अनुभव किया और उस पर जो पुस्तकें लिखी हैं, वह बहुत ही सराहनीय है। उन्होंने कहा कि बंगाल के पत्रकार जो काम नहीं कर सकें, वह श्री रास बिहारी ने दिल्ली से बंगाल जाकर किया है। पुस्तकों के माध्यम से बंगाल की सच्चाई जनता के सामने आई हैं। उन्होंने इस मौके पर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्री रास बिहारी की पुस्तकों की प्रशंसा की है।
जाने माने पत्रकार एवं एडिटर्स गिल्ट ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष आलोक मेहता ने कहा कि रास बिहारी ने बहुत परिश्रम से पुस्तक तैयार की है। उन्होंने कहा कि बंगाल के बारे में पुस्तक में कई खुलासे किए हैं।
पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि बहुत विपरीत परिस्थितियों में बंगाल में काम करके श्री रास बिहारी ने जान का खतरा मोल लेकर अपनी पुस्तकें लिखी हैं। बंगाल के अंदरूनी इलाकों में लोगों से जानकारी जुटाकर यह पुस्तक लिखी गई है। बंगाल की रक्तरंजित राजनीति पर पुस्तक लिखना वाकई बहुत साहसिक कार्य है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा 2021 पर केंद्रित ‘भय आतंक का चुनाव’ शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक में बंगाल की चुनावी हिंसा से संबंधित कई चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए हैं। जैसे वर्ष 2021 के दौरान राजनीतिक हिंसा में 175 से ज्यादा लोग मारे गए। लेखक के मुताबिक चुनावी हिंसा में मरने वालों का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
वरिष्ठ पत्रकार एवं नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के अध्यक्ष रास बिहारी की इससे पहले पश्चिम बंगाल पर उनकी तीन पुस्तकें 2021 में बंगाल की रक्तरंजित राजनीतिक इतिहास पर रक्तांचल- बंगाल की रक्तचरित्र राजनीति, रक्तरंजित बंगाल- लोकसभा चुनाव 2019 और बंगाल- वोटों का खूनी लूटतंत्र प्रकाशित हो चुकी हैं।
लोकार्पण अवसर पर यश पब्लिकेशन के प्रबंध निदेशक राहुल भारद्वाज और जतिन भारद्वाज समेत कई पुस्तक प्रेमी और पत्रकार मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *