शिमला : हिमाचल प्रदेश के सरकार में अब मुख्यमंत्री की सुरक्षा से लेकर कार्यालय तक भी बदलाव होगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू पूर्व में कई बार सार्वजनिक तौर पर बोल चुके हैं कि हम तबादले करने के लिए नहीं आए हैं। इसीलिए पूर्व सरकार के स्टाफ को भी बदला नहीं गया है लेकिन अब प्रदेश में नए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री आवास, कार्यालय और उनकी सुरक्षा टीम में भी बदलाव करने की योजना बनने लगी है। ऐसे में जल्द ही अधिकांश समय मुख्यमंत्री के संपर्क में रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को बदला जाएगा।
सुक्खू ने कहा है कि सरकार अब अयोग्य घोषित कांग्रेस विधायकों का मान-मनौव्वल नहीं करेगी। सरकार को स्थिर बनाए रखने के लिए वीरभद्र गुट को साधने की रणनीतिं तैयार की गई है। इसके अलावा कांग्रेस के 34 विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत लगाई जाएगी।
छह अयोग्य विधायकों सहित भारतीय जनता पार्टी के आगामी रुख पर खुफिया तंत्र कड़ी नजर रखेगा। नाराज चल रहे संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं को सरकार में नियुक्तियां भी दी जाएंगी। कांग्रेस हाईकमान से चर्चा के बाद सरकार ने अब अस्थिरता के माहौल से बाहर निकलते हुए एक्शन मोड में आने का फैसला लिया है।
छह अयोग्य विधायकों सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, इंद्र दत्त लखनपाल, देवेंद्र भुट्टो, चैतन्य शर्मा और रवि ठाकुर के बारे में अब और अधिक सोच विचार नहीं करने का फैसला हुआ है। अब श्री सुक्खू का पूरा फोकस सरकार और संगठन की मजबूती पर है।
इसी कड़ी में कांग्रेस सरकार को स्थिर बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाना शुरू कर दिए गए हैं। शनिवार को महाधिवक्ता कार्यालय में हुई बीस नियुक्तियां भी इसी रणनीति का परिणाम है। बीते वर्ष सरकार ने महाधिवक्ता कार्यालय में 35 नियुक्तियां की थीं।
लंबे समय से संगठन की ओर से और नियुक्तियों की मांग उठ रही थी। अब सरकार ने 20 और अतिरिक्त महाधिवक्ता और उप महाधिवक्ता नियुक्त कर दिए हैं। किसी भी सरकार को सत्ता में पहुंचाने के लिए अहम भूमिका निभाने वाले कांगड़ा जिले में भी भरपाई का काम शुरू हो गया है।
आने वाले दिनों में और नियुक्तियां किए जाने के संकेत भी सरकार की ओर से दिए गए हैं। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद प्रतिभा सिंह को आश्वस्त किया कि अब सरकार और संगठन में पूरा समन्वय बनाया जाएगा।
हिमाचल में मुख्यमंत्री की सुरक्षा से लेकर कार्यालय तक में होगा बदलाव
