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विंध्य क्षेत्र प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दिन होगा आनंद विभोर

महोबा : अयोध्या में 22 जनवरी को भव्य और दिव्य राम मंदिर के उद्घाटन का विंध्य अंचल भी अति गर्वित और पुलकित होकर प्रतीक्षा कर रहा है, जब वह त्रेता युग में कोई नौ लाख वर्ष पहले यहां वनवासी भगवान राम के साथ हुए अपने अभूतपूर्व साक्षात्कार का स्मरण करते हुए आनंदोत्सव मनाएगा। इस अवसर पर समूचे अंचल में यहां प्रभु राम के वनवास काल से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों को नूतन साज. सज्जा से दमकाने के साथ ही विशेष पूजन.अनुष्ठान के कार्यक्रमो के आयोजन की तैयारी है।
करीब पांच सौ वर्षों के लंबे संघर्ष के उपरांत अयोध्या में जन्म भूमि स्थल पर भव्य मंदिर के निर्माण उपरांत भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर जन.जन में भारी उल्लास है। मन्दिर के उद्घाटन कार्यक्रम से अखिल विश्व को जोड़ने के लिए सभी को अक्षत देकर आमंत्रित किया जा रहा है। चारो ओर धार्मिक वातावरण में श्रद्धा व भक्ति की बयार बह रही है। ऐसे में समूचा बुंदेलखंड भी ‘राम आएंगे तो मेरी झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे’ की अनुगूंज में उल्लसित और मंत्रमुग्ध है।
विंध्य अंचल का एक.एक कण इस अवसर पर कौशल्या नंदन के उस त्यागी और तपस्वी मनमोहक स्वरूप पर न्योछावर है जिसे उन्होंने 14 वर्ष के वनवास काल मे धारण रखते हुए इस क्षेत्र में गुजारा था। यही वजह है कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अयोध्या में होने के बावजूद चित्रकूट से लेकर महोबा तक के राम वन गमन पथ में उनके प्रति श्रद्धा भक्ति व समर्पण का अनूठा वातावरण निर्मित हुआ है।
बुंदेलखंड के महोबा में भगवान राम से जुड़े विख्यात तीर्थ श्री रामकुंड धाम स्थित उमंगेश्वर महादेव मंदिर के प्रमुख पुजारी शिव किशोर पांडेय कहते है कि वनवास मिलने पर अयोध्या से निकल सरयू नदी पार करके अवध की सीमा छोड़ने के बाद प्रभु राम ने विंध्य अंचल में प्रवेश करके सबसे पहले चित्रकूट में प्रवास किया था। इसके उपरांत वह महोबा में भी काफी समय तक रहे थे। कामदगिरि की तरह यहां गोरखगिरि पर्वत क्षेत्र में अवस्थित श्रीराम कुंड धामए सीता रसोईए समेत विभिन्न प्रमुख स्थल इसके प्रमाण स्वरूप आज भी विद्यमान है। श्रद्धालुओ के लिए इनका खास महत्तम भी है। भारत रत्नए पूर्व सांसद नाना जी देशमुख का सानिध्य पाकर चित्रकूट तो धार्मिक नगरी के रूप में स्थापित हो विकास की राह पकड़ गया जबकि श्रीराम को रमाने वाला महोबा और उसके धार्मिक स्थल आज तक अपना उचित स्थान नही पा सके।
जगनिक शोध संस्थान के सचिव डा वीरेंद्र निर्झर कहते है कि अयोध्यापति श्रीराम बुंदेलखंड में ही आकर भगवान बने। उनके यौवनावस्था का बड़ा समय बनवास काल के दौरान इसी क्षेत्र में गुजरा। बुंदेलखंड प्रवास में उन्होंने विभिन्न देव स्थलों पर हवन,पूजन, अनुष्ठान आदि सत्कर्म करते हुए अपना समय ब्यतीत किया और तमाम सिद्धियां प्राप्त कीं। जो लंका विजय में उनकी सहायक हुईं। महोबा में श्रीरामकुण्ड धाम में अवस्थित प्राचीन पुरातात्विक अवशेष भगवान श्रीराम द्वारा देवाधिदेव महादेव की पूजा.आराधना और यज्ञ किये जाने का प्रमाण देते है। इसके अलावा गोरखगिरी की कंदराओं में स्थित सीता रसोई यहां उनके प्रवास का एक अन्य बड़ा प्रामाणिक उदाहरण है। गोरखगिरी का यह क्षेत्र बाद में सुविख्यात संत गुरु गोरखनाथ की तपसाधना स्थली भी बना।
वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय के प्रवक्ता डा एलसी अनुरागी कहते है कि प्रभु राम से जुड़ाव साबित होने के बावजूद महोबा को भीलनी शबरी की भांति उद्धार के लिए उचित समय की प्रतीक्षा है। सरकार ने राम वन गमन पथ में शामिल सभी स्थलों के विकास का खाका तैयार किया है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसमे महोबा को समल्लित नही किया गया। जिससे ठोस परियोजनाओं द्वारा नियोजित तरीके से विकास से वंचित हो यह धार्मिक क्षेत्र का दर्जा प्राप्त नही कर पायेगा। हालांकि महोबा ओर श्रीराम से जुड़ा उसका गोरखगिरी सिद्ध क्षेत्र श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रत्येक पूर्णिमा और अमावस्या पर सैकड़ो की संख्या में भक्त यहां रामधुन संकीर्तन के साथ श्रद्धा और भक्ति से परिक्रमा कर पुण्य अर्जन करते है।

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