नई दिल्ली : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका एवं महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि देश की आजादी में सिखों के योगदान को भुलाने की आज कोशिश की जा रही है। श्री काहलों ने कहा कि देश की आजादी में सिखों ने 85 प्रतिशत कुर्बानियां दी लेकिन किताबों में सिखों के स्थान पर पंजाबियों शब्द का प्रयोग किया गया है तथा आगे जाकर पंजाबियों शब्द हटाकर देशवासी लिख दिया जाएगा ताकि सिखों की कुर्बानी को दरकिनार किया जा सके।
समिति ने मंगलवार को 1984 में हुए सिख दंगों को लेकर गुरुद्वारा बंगला साहिब में अरदास समागम का आयोजन किया। दंगों में मारे गए सिख परिवारों को सच की दीवार पर मोमबत्तियां जला कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
अध्यक्ष और महासचिव ने कहा कि वर्ष 1984 से लेकर अब तक जान गंवाने वाले सिख परिवारों को हम श्रद्धांजलि देते आ रहे हैं। हर वर्ष गुरुद्वारा बंगला साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब रखा जाता है तथा भोग डाला जाता है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि 38 वर्षों से सिख कौम को इन्साफ नहीं मिला है। हालांकि मौजूदा सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी की जांच से सज्जन कुमार व अन्य दोषियों को सज़ा मिली लेकिन बहुत सारे दोषी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं तथा सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा का आनंद ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बेशक देश की राजधानी में यह त्रासदी हुई पर सिख कौम चढ़दीकला का प्रतीक है। जब राजधानी में कोरोना महामारी आई तो हमने बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों के लोगों को लंगर छकाया तथा स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाईं क्योंकि गुरु नानक देव जी ने यही सिद्धांत सिख कौम को दिया है। इस अवसर पर दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारी, कमेटी सदस्य और अन्यों के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
सिखों के योगदान को भुलाने की कोशिश
