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यूक्रेन संकट तनाव जारी: जो बाइडेन की रूस को सीधी चेतावनी

यूक्रेन संकट के कारण अमेरिका और रूस में तनाव काफी बढ़ा हुआ हुआ है, रूस ने अपनी सेना की तैनाती यूक्रेन के चारो तरफ कर दी है जिस कारण यूक्रेन पर रूस के हमले की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में रूस को एक बार फिर से कड़ी चेतावनी दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से यह चेतावनी तब आई जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लिए जाने की बात दोहराई. पुतिन ने कहा था कि रूस कभी भी घुसपैठ की नीति पर योजना नहीं बनता और रूस यूरोप में एक और युद्ध नही चाहता.

अमेरिका -रूस के बीच तीखी आलोचनाए

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले की संभावना है जो कि बहुत बड़ी मानवीय क्षति का कारण बन सकती है.इसलिए हम भी पूरी तरह से रूस के हमले पर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है. बाइडेन ने कहा कि रूस के लगभग 1.5 लाख सैनिक यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात है. सैनिकों की मौजूदगी के विषय में कल रूस ने कहा था कि कुछ सैनिकों को वापस बुला लिया है. लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस के इस दावें की पुष्टि पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्लेषकों की जानकारी के अनुसार अभी भी रूस की सैनिक खतरनाक स्तिथि में तैनात है.

रूस और यूक्रेन सीमा पर हालात नवम्बर माह से ही चिंताजनक है. दोनों ही देशों ने अपनी सीमाओं पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रखी है. यूक्रेन ने मंगलवार को उनके रक्षा मंत्रालय और दो बैंकों की वेबसाइट पर साइबार हमला होने की खबर दी थी और पहले भी कई बार यूक्रेन के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की वेबसाइट पर साइबार हमले हो चुके है इन सबके पीछे यूक्रेन ने रूस का हाथ बताया. अमेरिका ने भी यूक्रेन में अस्थिरता पैदा करने के लिए रूस द्वारा साइबर हमले की आशंका व्यक्त की थी.

क्या है यूक्रेन-रूस विवाद

रूस के यूक्रेन के साथ ऐतिहासिक सम्बन्ध रहे है, सोवियत संगठन के दौर में यूक्रेन रूस के साथ था लेकिन इसके विगठन के बाद वह अलग हो गया. रूस से अलग होने के बाद यूक्रेन के सम्बन्ध पश्चिमी देशों के साथ बढ़ने लगे. वर्तमान में अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन को नाटो में शामिल करना चाहते है लेकिन रूस इस मुद्दें पर असहमत है. यूक्रेन के नाटो में शामिल होने को रूस अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरा मानता है इसलिए रूस भी आक्रामक है. रूस चाहता है कि उसे आश्वासन मिले कि नाटो सेना के साथ यूक्रेन को सम्मलित न किया जाए. वहीं दूसरी और अमेरिका भी रूस के किसी भी रणनीतिक फैसले पर रूस पर कई वित्तीय प्रतिबन्ध लगाने के लिए तैयार है.

खबर स्त्रोत: बीबीसी


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