लखनऊ : सर्वाइकल कैंसर महिलाओं को होने वाला दूसरा सबसे प्रमुख कैंसर है। दुनियाभर में सर्वाइकल कैंसर के मामले में भारत पांचवे नंबर पर है। यह पुरुषों से महिलाओं में पहुंचता है। जागरूकता से सर्वाइकल कैंसर को हराया जा सकता है। नौ से 14 साल की बेटियों को एचपीवी से बचाव की वैक्सीन लगवा सकते हैं। इससे काफी हद तक सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है।
यह जानकारी केजीएमयू स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीनमेरी) की डॉ. सुजाता देव ने दी। शनिवार को एसोसिएशन ऑफ गायनकोलॉजी आंकोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया की ओर से गाइनी-आंकोलॉजी कान्फ्रेंस हुई।क्वीनमेरी की डॉ. सुजाता देव ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। यह बच्चेदानी के मुंह में विकसित होता है। जोकि महिलाओं के सर्विक्स की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। ह्यूमन पैपिलोमा (एचपीवी) से महिलाओं में कैंसर पनपता है। राहत की बात यह है कि सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह से रोका जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में हर साल 1.23 लाख सर्वाइकल कैंसर के मामले आते हैं। 67 हजार महिलाएं हर साल इस बीमारी से दम तोड़ देती हैं।
टीकाकरण से बचाव मुमकिन
डॉ. सुजाता देव ने कहा कि एचपीवी से बचाव के लिए नौ से 14 साल की बेटियों का टीकाकरण जरूरी है। टीके की दो खुराक बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने में प्रभावी है। 15 से 45 वर्ष की आयु वाले लोगों के लिए इस वैक्सीन की तीन खुराक लेनी जरूरी है।
पूरी तरह से सुरक्षित है वैक्सीन
क्वीनमेरी की विभगाध्यक्ष डॉ. एसपी जायसवार के मुताबिक एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति साफ सफाई रखकर महिलाएं कई तरह की बीमारियों से बच सकती हैं। शुरूआत में सर्वाइकल कैंसर का इलाज संभव है।
स्तन की गांठ को नजरअंदाज न करें
क्वीनमेरी की डॉ. निशा सिंह ने कहा कि स्तन में पड़ने वाली सभी गांठ कैंसर नहीं होती हैं। पर, गांठ को नजरअंदाज न करें। समय-समय पर महिलाएं स्तन की जांच करें। गांठ की दशा में डॉक्टर की सलाह लें। जांच कराएं। शुरूआत में जांच व इलाज से कैंसर को मात दी जा सकती है। 40 की उम्र पार कर चुकी महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर मैमोग्राफी जांच जरूर कराएं। इससे काफी हद तक स्तन कैंसर को समय पर पकड़ सकते हैं।
