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टीबी के आयुर्वेदिक उपचार पर कार्यशाला

नई दिल्ली : अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक प्रो तनूजा मनोज नेसरी ने कहा है कि देश वर्ष 2025 तक टीबी को समाप्त करने की राह पर है और इस क्षेत्र में आयुर्वेद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है। नेसरी ने शुक्रवार को संस्थान में सुप्त तपेदिक संक्रमण (एलटीबीआई) – टीबी के प्रति देश में जागरूकता लाने और आयुर्वेद में इसका सफल उपचार उपलब्ध होने की जानकारी के प्रसार के उद्देश्य से दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान टीबी जैसी बीमारी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक संकल्पों की दिशा में नई ऊर्जा का संचार करेगी।
उन्होंने कहा कि संस्थान में टीबी की जानकारी,प्रबंध और निदान की दिशा में लम्बे समय से प्रयास किये जा रहे है और इसमें काफी सफलता भी मिली है। इस अवसर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी प्रभाग में संयुक्त निदेशक डॉ. रघुराम राव, डीन प्रो आनंद मोरे उपस्थित रहे।
इस कार्यशाला में विशेष रूप से दिल्ली और हरियाणा राज्य के आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी भाग ले रहे है। देश ही नहीं दुनिया की बड़ी आबादी एलटीबीआई से पीड़ित है इसमें टीबी के जीवाणु शरीर में सुप्तावस्था में रहते हैं। इससे बचाव के लिए विभिन्न रक्त परिक्षण या टीएसटी टेस्ट कराने जरूरी होता है। इसके अलावा कार्यशाला में सुप्त क्षय रोग संक्रमण और आयुर्वेदिक प्रबंधन की जानकारी दी जायगी। रोग को समझने और इसके उपचार एवं प्रबंध के विषय में दो दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न सत्रों में जानकारी दे जायगी।
आयुष मंत्रालय और स्वस्थ्य मंत्रालय की टीबी से जुडी विभिन्न योजनाओ की जानकारी दी जायगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत अभियान को जन जन तक पहुंचाने पर भी चर्चा होगी। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में केस स्टडीज़ और लाभार्थियों को भी देश और दुनिया के सामने लाया जायेगा।

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