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यमुना खतरे के निशान से ऊपर

मथुरा : मथुरा में बाढ़ का प्रकोप धीरे धीरे भले ही कम हो रहा हो लेकिन प्रयाग घाट पर यमुना गुरूवार को शाम खतरे के निशान से 47 सेमी ऊपर बह रही थी। ओखला और ताजेवाला हेडवक्र्स से पानी छोड़ने के कारण मथुरा में एक बार फिर से बाढ आ गई है तथा वृन्दावन के परिक्रमा मार्ग पर नाव चल रही हैं।
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बताया कि बाढ का पानी धीरे धीरे कम होने के कारण बाढ प्रभावित क्षेत्र में सिल्ट है और रपटन भी है। यमुना में जल का बहाव काफी तेज है। किसी दुर्घटना को रोकने के लिए बाढ प्रभावित हुए क्षेत्र में जाने या स्नान करने पर रोक लगा दी गई है।
उन्होने बताया कि बाढ का पानी कम होने के कारण बीमारियां फैल रही हैं विशेषकर कन्जक्टवाइटिस का प्रकोप तेज है। वैसे तो डाक्टरों की टीमे बाढ प्रभावित हर घर में जा रही है फिर भी कन्जक्टवाइटिससे पीड़ित लोगों से कुछ समय के अन्तराल में आंखों को धोने तथा परिवार के अन्य सदस्यों से बीमारी के दौरान अलग रहने की सलाह दी गई है।
जिलाधिकारी के अनुसार घाट किनारे बसी कालोनियों एवं सबसे अधिक ऊंचाई पर बसे चोैबिया पाड़ एवं ककोरन घाटी मोहल्लों तक में बिजली और पानी की व्यवस्था वैकल्पिक रूप से की जा रही है।उन्होंने कहा कि कहीं से किसी अप्रिय घटना का समाचार नही है तथा शरणालयों में सभी सामान की आपूर्ति की जा रही है। गुरूवार की सुबह यमुना का जलस्तर 166.59 मीटर पर था जब कि मथुरा में खतरे का निशान 166 मीटर पर है।

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