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बायो-फ्यूल वाले स्टारडस्ट रॉकेट से छात्र और निजी फर्म भी कर सकेंगी स्पेस रिसर्च

ब्लू-शिफ्ट एयरोस्पेस बायो-फ्यूल से चलने वाले स्टारडस्ट 1.0 रॉकेट का परिक्षण करके स्पेस रेस में शामिल हो गया है। अन्तरिक्ष की दौड़ में दुनिया के बड़े देश कई वर्षों से लगे हुए है, लेकिन हाल ही में स्पेस-एक्स और बोइंग जैसे निजी स्टार्टअप ने स्पेस रिसर्च को नई गति दी है। स्पेस रिसर्च से जुड़े अभियानों के लिए लगातार निजी क्षेत्र की कई कम्पनियां रोजाना नए इनोवेशन कर रही है। हाल ही में ब्लू-शिफ्ट एयरोस्पेस द्वारा लॉन्‍च स्टारडस्ट 1.0 इसका उदाहरण है।

ब्लू-शिफ्ट स्टारडस्ट 1.0 एक ऐसा बूस्टर रॉकेट है जिसको बायो-फ्यूल से चलाया जा सकता है। यह रॉकेट छोटे सॅटॅलाइट को अन्तरिक्ष में ले जाने और किसी भी स्पेस व्हीकल को स्पेस की उड़ान में गति देने के लिए इस्तेमाल किये जाते है। वर्षों से हम पारंपरिक फ्यूल से चलने वाले रॉकेट का ही इस्तेमाल करते आ रहे है। बायो फ्यूल रॉकेट के सफल परिक्षण से भविष्य की स्पेस उड़ानों में पर्यावरण को कम हानि होगी और कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा।

कमर्शियल स्पेस मार्किट की नई उम्मीद है स्टारडस्ट

स्टारडस्ट 1.0 अमेरिका के “मेन” राज्य में स्थापित ब्लू-शिफ्ट एयरोस्पेस द्वारा तैयार किया गया है। कंपनी इस रॉकेट को बनाने और इस पर रिसर्च करने का काम 2014 से ही कर रही थी।
ब्लू-शिफ्ट कई असफल परीक्षणों के बाद इस तकनीक में सफल हो पाई. स्टारडस्ट 1.0 की इस सफलता के बाद ब्लू-शिफ्ट कंपनी को आसानी से नए निवेशक भी मिलेंगे।

स्टारडस्ट रॉकेट पारंपरिक फ्यूल से सस्ता होने की वजह से कमर्शियल स्पेस मार्किट के लिए एक नए विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। यह राकेट बहुत ही कम खर्च में पृथ्वी के लो-ऑर्बिट स्पेस तक जा सकता है। रिसर्च, बिज़नस और एजुकेशनल उदेश्यों के लिए कई निजी संस्थाएं और कंपनियां स्पेस में अपने उपकरणों का परीक्षण करना चाहती है। ऐसे में स्टारडस्ट 1.0 कमर्शियल स्पेस मार्किट की इन समस्याओं को हल करेगा।

स्टारडस्ट 1.0 रॉकेट की खासियत

पर्यावरण के अनुकूल ब्लू-शिफ्ट का यह रॉकेट अपने आप में पहला कमर्शियल बूस्टर राकेट है।बायो-फ्यूल से चलने वाला यह रॉकेट एक सिंगल स्टेज प्रोटोटाइप है जो कि अभी सिर्फ पृथ्वी के लो-ऑर्बिट तक उड़ान भर सकता है। बायो-फ्यूल रॉकेट पूरी तरह से री यूजेबल है। रॉकेट की लम्बाई लगभग 20 फीट और वज़न लगभग 250 किग्रा है। यह रॉकेट अभी अपने साथ 8 किग्रा का पेलोड लेकर लो ऑर्बिट तक उड़ान भर सकता है लेकिन ब्लू-शिफ्ट का लक्ष्य 2024 तक 30 किग्रा के पेलोड को पृथ्वी के लो ऑर्बिट में पहुँचाना है।

परिक्षण के दौरान इस राकेट ने 4000 फीट की उंचाई तक उड़ान भरी जिसके बाद पैराशूट के द्वारा यह सही सलामत पृथ्वी पर वापस आ गया। ब्लू-शिफ्ट कम्पनी बहुत ही जल्द 2021 में ही इसके अगले प्रोटोटाइप स्टारडस्ट 2.0 का परिक्षण भी करेगी।अगले रॉकेट की क्षमता पहले रॉकेट से कुछ ज्यादा होगी।

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