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यूपी में गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

प्रयागरज: पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश और बंधों से पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर प्रदेश में प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियाें का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से शनिवार को दी गयी आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रयागराज में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 0.62 सेंटीमीटर और यमुना का 0.57 सेंटीमीटर ऊपर चला गया। इसके अनुसार प्रयागराज में दोनों नदियों के खतरे का निशान 84.74 मीटर है। फाफामऊ में गंगा नदी का पानी रात 12 बजे 85.35 मीटर दर्ज किया गया है जबकि छतनाग में जलस्तर 84.66 मीटर था। वहीं यमुना नदी का नैनी में जलस्तर 85.31 मीटर दर्ज किया गया है। पिछले 24 घंटे में गंगा फाफामऊ और छतनाग में खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर जबकि नैनी में यमुना 63 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। गंगा और यमुना के जलस्तर में हो रहे इजाफे को देखते हुए शहर के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के मकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। जिससे लोग अब राहत शिविर की ओर बढ़ रहे हैं। करीब 150 गांव और शहर के दाे दर्जन से अधिक मुहल्ले बाढ़ की चपेट में हैं।
जिला प्रशासन ने बाढ़ की भयावहता को देखते हुए राहत शिविरों की संख्या में इजाफा किया है। शरणार्थियों के लिए प्रशासन ने शहर में सेंट जोसेफ गर्ल्स कालेज ममफोर्डगंज, एनीबेसेंट स्कूल एलनगंज, स्वामी विवेकानंद स्कूल अशोकनगर, यूनिटी पब्लिक स्कूल करेली, कैंट हाईस्कूल सदर बाजार, रीगल गेस्ट हाउस राजापुर, डीएवी इंटर कालेज राजापुर समेत करीब डेढ़ दर्जन से अधिक राहत शिविर की व्यवस्था की है। राहत शिविरों में करीब 4000 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है। शिविर में रहने वालों को प्रशासन की तरफ से भोजन की व्यवस्था की गई है। सूत्रों ने बताया कि दोनों नदियों के जल स्तर में यदि जल्द ही ठहराव नहीं आया तो एक बार फिर 1978 और 2013 के बाढ़ की पुनरावृत्ति हो सकती है। वर्ष 1978 में गंगा 87.98 मीटर एवं यमुना 87.99 मीटर और 2013 में गंगा का जलस्तर 86.82 मीटर तथा यमुना का लेबल 86.60 मीटर ऊपर पहुंच गया था। अब गंगा 85.35 मीटर तो यमुना 85.31 मीटर पर बह रही है। शहर में दारागंज, रसूलाबाद, फाफामऊ, ककरहा, अरैल, छतनाग और नई झूंसी के तट पर गंगा किनारे लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने शहर और दूरदराज से भी पहुंचते है। इन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भर जाने से परिजन श्मशान घाट पर सनातनी परंपरा से अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं। अब लोगों को दारागंज और शंकरघाट विद्युत शवदाह केन्द्र का सहारा लेना पड़ रहा है।

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