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बिहार में बालू घाटों के बाहर अवैध खनन

पटना : नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भौगोलिक सूचना प्रणाली अध्ययन की मदद से बिहार के अभिरूचि के क्षेत्रों में सभी बालू घाटों के बाहर अवैध खनन किये जाने का खुलासा किया है। बिहार के महालेखाकार (लेखा परीक्षा) रामावतार शर्मा ने विधानसभा में शुक्रवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) का बिहार के वर्ष 2020-21 के लिए ‘खनिज प्राप्तियों के मूल्यांकन और संग्रहण में प्रणालियों और नियंत्रणों’ पर निष्पादन लेखा परीक्षा रिपोर्ट पेश होने के बाद संवाददाताओं को बताया कि भौगोलिक सूचना प्रणाली अध्ययन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना की मदद से उपग्रह छवियों का विश्लेषण किया गया, जिससे अभिरूचि के क्षेत्रों में सभी बालू घाटों के बाहर अवैध खनन किया जा रहा था।

चयनित अभिरूचि के क्षेत्रों में उपग्रह छवियों के विश्लेषण से अवैध खनन का पता चला और यह भी पता चला कि अवैध खनन का चलन बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि तीन जिलों में सोन बालू घाटों में उपलब्ध उपग्रह छवियों का गूगल अर्थ प्रो के विश्लेषण से पता चला कि खनन गतिविधियां पर्यावरणीय प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना 12 बालू घाटों में की गई।
श्री शर्मा ने बताया कि 14 नमूना जिलों में खनिजों के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले एम्बुलेंस, बस, ऑटोरिक्शा, कार, मोटरसाइकिल के 46935 अवास्तविक वाहनों की पंजीकरण संख्या का उपयोग करके 243811 ई-चालान जेनरेट किए गए थे। ग्यारह जिला खनन कार्यालयों में 15723 मामलों में बालू ले जाने के लिए एक दिन में एक वाहन के लिए 11 से 861 ई-चालान बनाये गये। चार जिलों में संबंधित पट्टेदारों ने वर्ष 2018-20 के दौरान पत्थर निर्गत करते समय एक दिन में 10 बार से 142 बार तक ई-चालान जेनरेट किया। उन्होंने बताया कि 16 कार्य प्रमंडलो में लेखापरीक्षा द्वारा सत्यापित 33191 ई-चालानों में से 21192 (63.85 प्रतिशत) फर्जी पाये गये तथा विभिन्न निर्माण कार्यों में प्रयुक्त किये गये थे।
महालेखाकार ने बताया कि खान एवं भूतत्व विभाग के उदासीन रवैये के कारण जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट अधूरे रहे। विभाग ने वर्ष 2020-24 के लिए बालू घाट के पट्टों के बंदोबस्त की प्रक्रिया के लिए अनिवार्य जिला सर्वेक्षण रिपोर्टों को पूरा किए बिना शुरू की। सर्वोच्च न्यायालय ने विभाग को नए सिरे से जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। यदि विभाग ने निविदा प्रक्रिया से पूर्व जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार किया होता और नये पट्टेदारों के साथ पट्टों का निष्पादन किया होता तो विभाग को राजस्व की प्राप्ति होती।

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