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डरे हुए नीतीश राजनीति में अप्रासंगिक

भाजपा में उनके लिए दरवाजा बंद

पटना : डॉ. संजय जायसवाल ने आज कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार डरे हुए हैं और राजनीति में अप्रासंगिक हो गए हैं, उनके लिए भाजपा का दरवाजा बंद है ।
डॉ. जायसवाल ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान नीतीश कुमार पर निशाना साधा और कहा, “जो व्यक्ति राजनीतिक तौर पर बिल्कुल अप्रासंगिक हो गया हो और आज उनको न उनके दल में कोई पूछ रहा है, न विरोधी दल में कोई पूछ रहा है और न इस देश की राजनीति में कोई पूछ रहा है । वह व्यक्ति जो इतना डरा हुआ है कि मुख्यमंत्री होने के बाद भी उसको जनता से मिलने में डर, शर्म और झिझक लगता हो, इतने सारे समाधान यात्रा में वह एक भी आम आदमी से मिल नहीं सके, ऐसे डरे हुए व्यक्ति को कौन अपने साथ रखना चाहेगा ।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश कुमार के लिए अब उनकी पार्टी का दरवाजा बंद है। उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता उपेंद्र कुशवाहा के भाजपा में आने की अटकलों को भी खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसी कोई वार्ता नहीं हो रही है ।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जहां किसानों को बढ़ाने का काम कर रही है वहीं बिहार सरकार किसानों को बरगलाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार के किसी भी जिले में आज उर्वरक की कोई कमी नहीं है लेकिन बिहार सरकार कमी का रोना रो रही है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार के कृषि मंत्री केवल यह बता दें कि पिछले 90 दिनों के अंदर स्टॉक में कभी 15 लाख बोरा से कम यूरिया हो । आज भी बिहार में 20 लाख बोरा से ज्यादा यूरिया उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का काम रैक प्वाइंट तक उर्वरक पहुंचाने का है, उसका वितरण करना राज्य सरकार का काम है।
इस मौके पर उपस्थित भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि 22 फरवरी को सुबह 11 बजे पटना के बापू सभागार में स्वामी सहजानंद सरस्वती जयंती समारोह सह किसान मजदूर समागम का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे । उन्होंने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती की कर्मस्थली बिहार रही । वर्ष 1927 में उन्होंने किसान सभा की स्थापना की और उसका केंद्र पटना के बिहटा को बनाया, वहीं से उन्होंने किसान आंदोलन को संचालित किया। बिहटा स्थित उनके आश्रम में सुभाष चन्द्र बोस भी इनसे मदद मांगने आए थे।
ठाकुर ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि किसान आंदोलन के जनक तथा भारत की आजादी में अहम योगदान देने के बावजूद एक युग पुरुष को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया गया। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी स्वामीजी को आधुनिक इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया गया, जबकि धर्म‚ समाज सुधार और राजनीति को लेकर आधुनिक भारत के निर्माण में उनका अभूतपूर्व योगदान है।
भाजपा सांसद ने कहा कि धर्म और समाज सुधार के क्षेत्र में उनका योगदान वैसा ही है‚ जो दयानन्द सरस्वती और विवेकानन्द का है। समाज सुधार में सहजानन्द के अर्थपूर्ण हस्तक्षेप के लिए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने उन्हें ‘दलितों का सन्यासी’ कहा है। स्वामी सहजानंद सरस्वती के राजनीतिक कद को समझने के लिए सुभाष चंद्र बोस का यह कथन महत्वपूर्ण है कि ‘साबरमती आश्रम में मैंने खादी धोती पहने कई सन्यासी को देखा लेकिन भारत का सच्चा सन्यासी मुझे पटना के बिहटा स्थित सीताराम आश्रम में मिला।
ठाकुर ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि देश के सबसे बड़े किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती और पुण्यतिथि पर बिहार में कोई भी राजकीय कार्यक्रम आयोजित नहीं होता है।

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