पटना : राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला आरक्षण पर गंभीर नहीं हैं और इस संबंध में विधेयक पारित करने के लिए बुलाया गया संसद का विशेष सत्र महज एक इवेंट मैनेजमेंट था। सिंह ने रविवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि महिला आरक्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और राजनीतिक नौटंकी होने की वजह से वह इस मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि मोदी संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में गंभीर होते तो वह बहुत पहले ही संसद में महिला आरक्षण विधेयक ला चुके होते और इसके लिए वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से साढ़े नौ साल तक इंतजार नहीं करते।
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संसद में पारित विधेयक के प्रावधान के अनुसार अगली जनगणना और परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद ही महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं को आरक्षण देने का कोई जिक्र नहीं है, जिसका मतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उन्हें आरक्षण देने के खिलाफ है।
सिंह ने कहा कि जाति जनगणना राष्ट्रीय स्तर पर होनी चाहिए और उनकी पार्टी द्वारा की गई मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना की तत्काल आवश्यकता है जो देश की जाति के आधार पर जनसंख्या का निर्धारण करेगी और उन लोगों को आरक्षण देने में भी मदद करेगी जिन्हें इसकी आवश्यकता है। उन्होंने टिप्पणी की कि जाति जनगणना होने से सांप्रदायिक एजेंडा समाप्त हो जाने के डर से भाजपा हमेशा इस गणना के खिलाफ रही है।
महिला आरक्षण को लेकर मोदी गंभीर नहीं
