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10 राजस्व ग्राम के 110 हेक्टेयर जमीन में रजिस्ट्री पर प्रतिबंध

गोरखपुर : (पी एम ए) जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने नदी बफर क्षेत्र, बाढ़ मैदान और नदी तल क्षेत्र पर किए जा रहे निर्माण कार्यों पर व्यापक रूप से प्रतिबंध लगाते हुए 10 राजस्व ग्राम के 110 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। ये सभी प्रतिबंधित क्षेत्र राजस्व ग्राम हावर्ड बंधा (डोमिनगढ़ से चकरा) 3.9 किलोमीटर के पश्चिम एवं राप्ती और रोहिन के पूर्व के नदी बहाव क्षेत्र व बांध के मध्य हैं। जिलाधिकारी ने अवैध व बिना मानचित्र स्वीकृत कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर विधिक कार्यवाही कर अवगत कराने को कहा है।

जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने इन सभी राजस्व ग्राम के सर्वेक्षण में चिन्हित किए गए गाटों का समुचित विवरण निबंधन कार्यालय को तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इन 10 राजस्व ग्राम के चिन्हित 110 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के गाटों का आवासीय, व्यवसायिक व वाणिज्यिकीय प्रयोजन के लिए क्रय-विक्रय या निबंधन कराया जाता है तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। प्राधिकरण को लिख कर देना होगा कि उपरोक्त भूमि आवासीय, व्यवसायिक व वाणिज्यिकीय प्रयोजन के लिए उपयुक्त है।

प्राधिकरण द्वारा मानचित्र स्वीकृत किए जाने में कोई आपत्ति नहीं होगी। इसी तरह यदि कृषि प्रयोजन हेतु क्रय-विक्रय या निबंधन कराया जाता है तो सिंचाई विभाग के संबंधित खण्ड, बाढ़ खण्ड/बाढ़ खण्ड-2/ड्रेनेज खण्ड से भूमि की अनापत्ति रिपोर्ट प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह लिखाना होगा कि भूमि कृषि प्रयोजन के लिए उपयुक्त है। यह भूमि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना सं0-2458 दिनांक 07 अक्टूबर, 2016 तथा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में योजित रिट याचिका मीरा शुक्ला बनाम नगर निगम गोरखपुर एवं अन्य में पारित आदेश के प्राविधानों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता है।

इन शर्तों के पूर्ण होने के बाद ही संबंधित उप निबंधक इन गाटों के विलेख को पंजीकरण के लिए स्वीकार करेगा। जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण को निर्देशित किया है कि मास्टर प्लान की तकनीकी जांच में यह सुनिश्चित कराएं कि नदी बफर क्षेत्र, बाढ़ मैदान तथा नदी तल के अंतर्गत कोई निर्माण कार्य प्रस्तावित न हो। गोरखपुर विकास प्राधिकरण गोरखपुर एवं जनपद के समस्त टाउन एरिया (नगर पंचायतों) में भवन निर्माण से पूर्व मानचित्र का अवलोकन कर मानचित्र को शासन द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर स्वीकृति प्रदान करेगा। स्वीकृति प्रदान करने से पूर्व प्राधिकरण एवं टाउन एरिया यह अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करेंगे कि भूमि नदी बफर क्षेत्र, बाढ़ मैदान और नदी तल के अंतर्गत नहीं है।

बिजली कनेक्शन, सड़क निर्माण, जलापूर्ति, जल निकासी के कार्य प्रभावित होंगे नगर निगम, विद्युत विभाग, जिला पंचायत राज विभाग, जल निगम तथा विकास प्राधिकरण एवं नगर पंचायतों से डीएम ने यह अपेक्षा की है कि नदी बफर क्षेत्र, बाढ़ मैदान तथा नदी तल के अंतर्गत निर्मित भवनों तक विद्युत आपूर्ति, सड़क निर्माण कार्य, जलापूर्ति, जल निकासी आदि अन्य सरकारी सेवाएं जारी अधिसूचना- 2458 07 अक्टूबर 2016 एवं राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेशों के अनुरूप प्रदान की जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि आदेशों का उल्लंघन नहीं किया जा रहा है।

सिंचाई विभाग अवैध निर्माण संबंधित विभाग को रिपोर्ट करेगा सिंचाई विभाग विशेष रूप से बाढ़ खण्ड, बाढ़ खण्ड-2 एवं ड्रेनेज खण्ड को निर्देशित किया गया है कि नदी बफर क्षेत्र, बाढ़ मैदान तथा नदी तल के अंतर्गत यदि कोई अवैध निर्माण कार्य कराया जा रहा है तो इस संबंध में लिखित रूप से गोरखपुर विकास प्राधिकरण, स्थानीय निकाय, नगर निगम और अन्य संबंधित विभाग को अनिवार्य रूप से सूचित करें।

राजस्व ग्राम-सरकारी खाता-आबादी खाता डोमिनगढ़ 0.6300 – 11.7730 नरसिंहपुर 0.8880 0.7220. 2.7090 मुन्डेरी चक 1.5580. 3.9110 3.8830 हनुमान चक 1.3700 2.310 11.101 बसंतपुर 5.6760 1.9100 23.4820 बसंतपुर खास 2.0760 0.2840 0.2840 हांसूपुर – 0.3380 1.5960 चकरा अव्वल . 1.4990 4.3640. 4.3920 – हांसूपुर 1.1800 0.1000 14.6140 मुन्डेरी चक 0.1100 2.4400 5.0400 योग- 14.987 16.3790 78.8740 (राजस्व ग्रामवार क्षेत्रफल हेक्टेयर में ) वन एवं पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय हेरिटेज फाउंडेशन गोरखपुर ने जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश के निर्णय की सराहना की है। फाउंडेशन की संरक्षिका डॉ अनिता अग्रवाल, मनीष चौबे, अनिल कुमार तिवारी ने मलौनी बांध पर सर्वेक्षण कर नदी बफर क्षेत्र, बाढ़ मैदान और नदी तल क्षेत्र पर किए जा रहे निर्माण कार्यों पर व्यापक रूप से प्रतिबंध लगाना चाहिए। इस कदम से लोग अपने जीवन की गाढ़ी कमाई को आवास की लालसा में अनुचित स्थान पर निवेश करने से बचेंगे। प्रकृति का संरक्षण भी होगा। दीर्घकालिक आर्थिक एवं जनहानि से भी बचाव होगा।

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