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अतिथि शिक्षकों को बेरोजगार करने पर प्रदर्शन

पटना : बिहार उच्चतर माध्यमिक अतिथि शिक्षक संघ ने राज्य में प्लस टू विद्यालयों में कार्यरत सभी अतिथि शिक्षकों को हर माह नियत मानदेय पर नियमित करने की मांग की है। अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने कहा कि राज्य में करीब चार हज़ार अतिथि शिक्षक छह साल से प्लस टू विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे हैं और उनके मानदेय में एक पैसा की बढ़ोतरी नहीं हुई हैं। उल्टे उन्हें नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के बाद बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

राजधानी पटना के गांधी मैदान में मंगलवार को सैकड़ों अतिथि शिक्षकों ने प्रदर्शन किया और सरकार से अपनी सेवा नियमित करने की मांग की। गांधी मैदान से राष्ट्रीय जनता दल के कार्यालय में स्मार पत्र देने जा रहे अतिथि शिक्षकों को पटना कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। फिर भी सैकड़ों अतिथि शिक्षकों ने राजद कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया औऱ अपनी सेवा नियमित करने की मांग की है। अतिथि शिक्षकों ने कहा कि उनकी उम्र किसी रोजगार के आवेदन देने की निर्धारित उम्र सीमा को पार कर गया है और इस उम्र में वे कहाँ रोजगार पा सकते है।
गौरतलब है कि राज्य में आधे से अधिक अतिथि शिक्षक महिला हैं और उनका मानदेय दिहाड़ी मजदूर से भी कम है। उन्होंने ने बताया कि जून माह में सभी अतिथि शिक्षकों का मानदेय मात्र 3000 रुपये ही बना है क्योंकि विद्यालय कार्य दिवस के आधार पर ही दिहाड़ी मजदूर की तरह उनका मानदेय प्रत्येक कार्यदिवस को मात्र 1000 रु ही है, इतना मानदेय जिले में बढ़ई, पेंटर,प्लम्बर आदि पा रहे हैं और रोज कमा रहे हैं। अतिथि शिक्षकों को विद्यालय में कक्षा लेने पर ही मानदेय मिलेगा, भले ही वे स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को विद्यालय जाएंगे लेकिन उस दिन का मानदेय नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों की सेवा से विद्यालयों में शिक्षा का नाम गुणात्मक सुधार आया है और परिणाम भी उत्साहवर्धक हैं। अतिथि शिक्षकों की सेवा चुनाव, मतगणना आदि में राज्यकर्मियों की तरह ली जाती रही हैं इसलिए सभी अतिथि शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देते हुए सेवा नियमित की जाय। कुमार ने बताया कि राज्य में आधे से अधिक महिला ही अतिथि शिक्षकों के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें किसी प्रकार की अवकाश देय नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सभी अतिथि शिक्षक स्नातकोत्तर डिग्री एवं बी एड डिग्री हासिल कर विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे हैं और एन सी टी ई के प्रावधानों के अनुसार प्लस टू विद्यालयों में नियमित सेवा के लिए अर्ह है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अतिथि शिक्षकों का मानदेय न्यूनतम मजदूरी से भी कम है अतः उन्होंने राज्य सरकार से मानदेय बढ़ाने मासिक वेतन तय करने और सेवा 60 साल तक नियमित करने की मांग की है।

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