भुज : आचार्य देवव्रत ने संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संगीत नाटअकादमी नयी दिल्ली तथा गुजरात राज्य आपदा व्यवस्थापन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में नौ से 11 मार्च के दौरान भुज में स्मृतिवन मेमोरियल में आयोजित लोककला महोत्सव ‘देशज’ का शनिवार को शुभारम्भ किया।
देवव्रत ने देशज महोत्सव के शुभारम्भ से पहले स्मृतिवन मेमोरियल की मुलाकात ली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जीवन उतार-चढ़ाव का नाम है। सुख-दु:ख, भोग और त्याग, प्रवृत्ति और निवृत्ति एक-दूसरे के साथ जुड़ी हैं। मानव एक ऐसा व्यक्तित्व है जो हर तरह की आपदाओं को आशा में बदलने का सामर्थ्य रखता है। एक समय में नष्ट हो चुका भुज आज विकास से लोगों के मानस पटल पर दैदीप्यमान बनकर उभर आया है। कच्छ जिले का खूब विकास हुआ है। “कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा” का विचार यहां के नागरिकों की सरलता, सौम्यता और परिस्थितियों के साथ तालमेल करने की क्षमता दर्शाता है।
राज्यपाल ने स्मृतिवन परिसर में देशज कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस महोत्सव में विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी कला का परिचय देकर कलाप्रेमियों का मनोरंजन करेंगे। भौतिक विकास के साथ ही लोगों के जीवन में तनाव बढ़ रहा है। भारतीय जीवन मूल्य आध्यात्मिकता से परिपूर्ण थे। इस तरह के मूल्य अब घट रहे हैं। व्यक्ति विषाद से निकलकर अपने जीवन को आनंद और सुख से आह्लादित बना सकता है। ऐसे अवसर ही जीवन को मजबूती प्रदान करते हैं। नाटक और संगीत ऐसी विद्या है जो लोगों के मन और आत्मा को तृप्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि संगीत हमारी जीवनशैली का परिचय देता है। समाज की परिस्थिति और चिंतन को प्रस्तुत करता है। नाटक बहुत ही गम्भीर विषय को सरल बनाकर बड़ी मुश्किलों का सामना करने की ताकत देता है। कलाकार राष्ट्र और समाज की महत्वपूर्ण पूंजी है। यह कलाकार हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को बचाने की धरोहर के रूप में काम करते हैं। जिस देश में कला और संस्कृति का जतन होता है, साहित्य का सम्मान होता है, वहां आनेवाली पीढ़ियां मजबूती से मुसीबतों का सामना करने में सक्षम बनती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मोदीजी भारत के लोगों की विचारधारा और सांस्कृतिक मूल्यों की गहन समझ रखते हैं। विविधता में एकता, एक भारत-श्रेष्ठ भारत बनाने की दिशा में देशज महोत्सव महत्वपूर्ण साबित होगा। भारत की संस्कृति हमेशा उदार रही है। भारतीयों को दुनिया अपना मानती है। समग्र विश्व को अपना परिवार मानने का चिंतन भारतीय संस्कृति में नजर आता है। भारतीय लोक संगीत, नाट्य एवं साहित्य विश्व को प्रेरणा देने वाला है।
संगीत नाटक अकादमी-नयी दिल्ली की प्रमुख डॉ. संध्या पुरेचा ने स्वागत सम्बोधन कर सभी का स्वागत किया। तीन दिवसीय देशज महोत्सव के दरमियान देशभर के 14 राज्यों के 500 कलाकार अपनी कला का भुज में प्रदर्शन करेंगे। पहले दिन चरी, गजियो, फाग, पंथी, डांगी, माथुरी, भांगडा, राठवा और गोफ रास प्रस्तुत किया।
देवव्रत ने किया देशज महोत्सव का स्मृतिवन में शुभारंभ
