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जैन समाज धूमधाम से मनाएगा 2550 वां निर्वाण कल्याणक वर्ष, जन-जन तक पहुंचेंगे भगवान महावीर के सन्देश

जैन समाज ने भगवान महावीर से जुड़े पर्व को हर्षोल्लास से मनाने की तैयारियां शुरू कर दी है, मानवता की वर्तमान पीढ़ी का सौभाग्य है कि एक बार फिर से भगवान महावीर के 2550 वां निर्वाण कल्याणक वर्ष मनाने का अवसर मिल रहा हैं। जैन समाज से जुड़े प्रतिनिधि रिखब चंद जैन ने इस अवसर को भव्य बनाने की अपील करते हुए यह कहा है कि ऐसे ऐतिहासिक अवसर बड़े पुण्य से, बड़े प्रारब्ध से प्राप्त होते है। महावीर का सन्देश जन-जन तक पहुंचे इसके लिए वर्ष भर में निर्वाण कल्याणक के आलावा भी गर्भ कल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा कल्याणक, केवल्य ज्ञान कल्याणक के आने वाले दिनों के हर वर्ष से अधिक बड़े तरीके से मनाये तभी वर्ष भर के कार्यक्रम भव्य बनेंगे। विशेषतौर से और हर सम्भव प्रयास किए जाये कि वर्ष भर में धर्म चक्र में उललेखित भगवान महावीर के सन्देश जन-जन तक पूरे विश्व, राष्ट्र, हर शहर, हर गांव, हर रास्ते और हर मोहल्लें में पहुंचायें।

जैन समाज का और भारत का राष्ट्रीय कर्तव्य है कि इस काम को बड़ी निष्ठापूर्वक पूरा किया जाये। यह सभी जानते है कि महावीर के सन्देश आज के सन्दर्भ में कितने और भी अधिक सार्थक है। मानवता को युद्ध से बचाने के लिए, कई तरह के आपसी द्वेष और झंझटों से दूर करने के लिए, मानव के कल्याण के लिए, दुनिया के विकास और आध्यात्मिक प्रवृतियों को बढ़ाने के लिए महावीर के उपदेश नित्यंत आवश्यक है।

प्रभु महावीर के सन्देश के प्रमुख सिद्धान्त वनस्पति एवं जीव रक्षा, दया आदि, अहिंसा, अल्पारंभ, तप, त्याग, न्याय, सम्यक लोकतलन्त्र, शाकाहार, नशामुक्ति, निःशस्त्रीकरण है। ये सब अत्यंत आवश्यक है। इन सन्देशों को आज के समय में प्रचलित शब्दों और प्रचलित तरीके से जनमानस के मन और हृदय तक पहुंचाने के लिए आज के प्रचलित बातचीत में प्रयोग होने वाले शब्दों को काम में लिया गया है, ताकि महावीर के प्रत्येक सन्देश का सार आसानी से हर कोई समझ सके | एक झलक में ही सारी बाते मोटे तौर पर धर्म चक्र से ही जान सकते हैं।

प्रभु महावीर के 2500 वां निर्वाण वर्ष में भी और उसके बाद 2600 वां जनकल्याणक वर्ष के अवसर पर समाज को इसी तरह के दायित्व निभाने के अवसर मिले थे। समाज ने काफी परिश्रम के साथ उस कर्तव्य को निभाया लेकिन इस बार उससे भी ओर अधिक जोश के साथ प्रयास करने है। करीब 20 वर्षों में तो कुछ महावीर के सन्देशों को दोहराने की आवश्यकता पड़ी है। नई पीढ़ी के लोगों को उनसे परिचित और जानकारी देना जरुरी हो गया हैं। मैं सभी समाज के प्रमुख, प्रबुद्ध संस्थानों का आह्वान करता हूँ कि अब समय बहुत कम है लेकिन तैयारी अभी तक कुछ भी नहीं है। इस कार्यक्रम को भव्य रुप देने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रयास चालू हो।

रिखब चंद जैन ने बताया कि मुझे भाई रतन जैन ने जो मान्य मंत्री-जैन महासभा और जैन महासंघ के है उन्होंने याद दिलाया और कहा कि उनके अनुसार 2600वें जन्म कल्याण वर्ष पर जो मैनें धर्म चक्र की प्रस्तुति की उसका व्यापक प्रयोग उस समय भी पूरे राष्ट्र में हुआ और अभी भी अनेक तरीको से उसका प्रयोग किया जा रहा है। यह चक्र धर्मग्राही बना था। इस वर्ष मुझे फिर सौभाग्य मिला कि मैं धर्म चक्र को आज के प्रचलित वाक्यों में प्रस्तुत करु। मैनें प्रभु की आज्ञा से ध्यान करके, अध्ययन करके इसे प्रस्तुत किया है। मुझे इस सेवा से प्रभु की सेवा करने का अवसर मिला उसके लिए मैं समाज का भी आभारी हूँ और प्रभु की कृपा के लिए भी प्रभु का ऋणी हूँ।






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