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महाभारत से कम नहीं है लोकसभा चुनाव

बेहरामपुर : मुख्तार अब्बास नकवी ने सोमवार को यहां कहा कि 2024 का चुनाव कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत से कम नहीं है, जहां सत्य से असत्य और धर्म से अधर्म का मुकाबला है। नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की सुरक्षा, समृद्धि, सशक्तीकरण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की रक्षा के पांडव संस्कार के नायक हैं, जो संकटों, कंटकों को परास्त कर भारत की धाक-धमक, धर्म की रक्षा कर रहें हैं। उन्होंने कहा, “एक जननायक की ताकत को अनेक खलनायकों की आफ़त अपहरण नहीं कर सकती। एक अकेला सब पे भारी है।”
उन्होंने पश्चिम बंगाल के बेहरामपुर, मुर्शिदाबाद क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन, कोर कमेटी, चुनाव प्रबन्ध कमेटी की मीटिंग और बाद में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि श्री मोदी की तपस्या की ताक़त और परिश्रम के परिणाम से मजबूत हुए भारत की धाक-धमक को धूमिल करने की कौरवी धूर्ततापूर्ण धुन धूल-धूसरित हो रही है।
श्री नक़वी ने कहा कि श्री मोदी ने ‘तुष्टीकरण के सियासी छल को सशक्तीकरण के समावेशी बल’ से ध्वस्त कर समावेशी विकास-सर्वस्पर्शी सशक्तीकरण की प्राथमिकता से विकास और विश्वास का पुख़्ता माहौल और वैश्विक स्तर पर भारत की आन बान शान में चार चांद लगाया है। उन्होंने कहा कि ‘मुस्लिम समुदाय का भी भाजपा हराओ रिवाज, मोदी जिताओ मिज़ाज’ में बदल गया है, उन्हें एहसास है कि ‘जब मोदी ने विकास में कमी नहीं की, तो वे वोटों में कंजूसी क्यों करें? यही बदलाव “वोटों के साम्प्रदायिक ठेकेदारों की ठसक की सियासी कसक का कारण है।”
भाजपा नेता ने कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस का गोदी गैंग गुनाहों के गटर पर गठबंधन का शटर लगाकर बेईमानी के बाहुबलियों का बसेरा बन गया है। नक़वी ने कहा कि चुनाव नतीजे से पहले ही कांग्रेस और उसके गोदी गैंग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर हार के हथौड़े का अभ्यास शुरू हो गया है, देश के भरोसे पर भय-भ्रम का भंवरजाल बिछाने की साजिशों का ताना-बाना बुना जाने लगा है। उन्होंने कहा कि यह वही साजिशी सिन्डीकेट है जो लगातार देश की संसद, संविधान, लोकतंत्र और भारतीय संस्कार, संकल्प एवं संस्कृति को बदनाम करने में लगा रहा।
उन्होंने कहा कि श्री मोदी के काम और करिश्मे ने किसी को माई-बाप, तो किसी को भाई-भतीजे, तो किसी को भाई-बहन की पार्टी में सिमटा दिया है, इनमें से अधिकांश दल 2024 के चुनाव के बाद अपनी मान्यता बचाने के लिए चुनाव आयोग के चक्कर काटेंगे।

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