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राज्य स्तरीय ऑडिट सप्ताह प्रारंभ

भोपाल : मध्यप्रदेश विधानसभा प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने आज 20 नवंबर से 24 नवंबर तक आयोजित ऑडिट सप्ताह का शुभारंभ महालेखा परीक्षक एवं महालेखाकार के विभिन्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में किया। सिंह के द्वारा मध्यप्रदेश एकाउन्टेंयट जनरल (ऑडिट) ऑफिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुये कहा कि संसदीय प्रणाली का आधार निर्वाचित विधायिका के प्रति शासन चलाने वाली कार्यपालिका का उत्तरदायी होना है।

कार्यपालिका का यह उत्तनरदायित्व सभा के सदस्यों द्वारा विधायी प्रक्रिया के तहत विधान सभा के सत्र के समय प्रश्न, ध्यानाकर्षण, बजट की मांगो पर चर्चा आदि के माध्यम शासन की नीतियों और कार्यक्रमों का विश्लेवषण कर सुनिश्चित किया जाता है। परन्तु विधान सभा का सत्र न होने पर यही कार्यपालिका की एकाउन्टबिलिटी के निर्धारण का कार्य विधान सभा की समितियों द्वारा किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन समितियों में विशेष रूप से वित्तीय समितियां, जैसे लोक लेखा समिति, सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी समिति, पंचायती राज लेखा समिति आदि के परीक्षण के कार्य में महालेखाकार एवं उनके कार्यालय द्वारा सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेयद 151 अंतर्गत विधान सभा के पटल पर रखे गये महालेखाकार के प्रतिवेदनों को वित्तीय समितियों के परीक्षण के लिये संदर्भित किया जाता है, यह समितियां शासन के विभागों से बजट के माध्यम से दी गई राशि का सही ढंग से उपयोग करने की स्थिति का परीक्षण महालेखाकार के अधिकारियों के द्वारा तैयार किये गये प्रतिवेदन के आक्षेपों के आधार पर किया जाता है।

शासन प्रणाली के तीनों अंगों की भांति संविधान के अनुच्छेकद 148 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के संबंध में प्रावधान किया गया है। इसी के अधीन महालेखा परीक्षक मध्य्प्रदेश का कार्यालय कार्यरत है। इस तरह विधायिका की समितियों के कार्य में महालेखाकार एवं उनके कार्यालय की भूमिका संवैधानिक दायित्वोंय के निर्वहन हेतु परस्पखर अनुपूरक एवं महत्वपूर्ण है।
श्री सिंह ने कहा कि विधायिका एवं उसकी समितियों तथा महालेखाकार के ऑडिट दोनों का ही उद्देश्यं शासन व्यववस्था में पारदर्शिता, एकाउण्टेाबिलिटी एवं गुड-गवर्नेंस को प्रमोट करने के लिये रचनात्ममक सुझाव देने की रहती है।

उन्होंन आशा व्यरक्त की कि 20 नवम्बवर से प्रारंभ हो रहे ‘ऑडिट सप्तानह’ में विभिन्नत सामयिक एवं उपयोगी विषयों पर चर्चा में परस्पंर ज्ञान एवं अनुभवों का आदान प्रदान किया जायेगा तथा जनसरोकार के विषयों पर विचार किया जायेगा, इससे महालेखाकार एवं उनकी टीम नई ऊर्जा के साथ अपने दायित्वोंक का गुणवत्ताल से निवर्हन करने में सक्षम हो सकेगी।

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