नई दिल्ली : दूरसंचार क्षेत्र में आने वाले वर्षाें में कुशल श्रमिकों की मांग और आपूर्ति में अंतर में तेजी से वृद्धि होने का अनुमान जताया गया है क्योंकि देश में जिस गति से इस क्षेत्र का विकास हो रहा है उस गति से कुशल कामगार तैयार नहीं हो पा रहे हैं। इस क्षेत्र के लिए भारत के प्रमुख कौशल विकास संस्थान टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल (टीएसएससी) ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में रोजगार के अवसरों, मांग आपूर्ति के बीच अंतर, दूरसंचार का टेक्नोलॉजी क्षेत्र में सम्मिलन और विभिन्न रोजगार भूमिकाओं में भारत में संभावना का खाका पेश करते हुए ड्रॉप के साथ मिलकर टेलीकॉम टैलेंटइन 5 जी एराःडिमांड सप्लाई स्किल गैप रिपोर्ट 2023-24 आज जारी की जिसमें कहा गया है कि भारत वर्तमान में 24.1 लाख पेशेवरों की मांग और आपूर्ति के अंतर का समाना कर रहा है और वर्ष 2030 तक इसके 3.8 गुना तक बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि सबसे प्रमुख चुनौतियों में से एक चुनौती यह है कि अकादमिक आवश्यकता और उद्योग की मांग के बीच बेमेल की वजह से टेक्नोलॉजी क्षेत्र में कंप्यूटर साइंस, आईटी और गणित में स्नातक केवल 40 प्रतिशत लोग ही रोजगार के योग्य पाये जा रहे हैं। भारतीय दूरसंचार उद्योग में लगे लोगों की कुल संख्या अभी 1.159 करोड़ है जिसमें 29.5 लाख कॉरपोरेट प्रतिभा और 82.4 लाख ब्लूकॉलर नौकरियों में हैं।
मांग आपूर्ति अंतर रिपोर्ट आगे इस बात को भी रेखांकित करती है कि शीर्ष सभी 15 स्ट्रीम्स में नेटवर्क ऑपरेशन और मेंटनेंस व प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग में सबसे अधिक कॉरपोरेट प्रतिभाएं हैं, जबकि नेटवर्क ऑपरेशन एवं मेनटेनेंस और सेल्स एवं डिस्ट्रीब्यूशन- सर्विस सेगमेंट में सबसे अधिक ब्लूकॉलर प्रतिभाएं हैं। इस रिपोर्ट को आज यहां इंडिया मोबाइल कांग्रेस में अनलॉकिंग दि पावर ऑफ टेलीकॉमः स्किलिंग फॉर ए कनेक्टेड वर्ल्ड विषय पर एक पैनल में लांच किया गया।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारत को वर्ष 2025 तक 5 जी केंद्रित उद्योगों खासकर क्लाउड कंप्यूटिंग, रोबोट और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसे क्षेत्रों में 2.2 करोड़ कुशल कामगारों की जरूरत पड़ेगी। भारत अकेला ऐसा देश है जहां टेक्नोलॉजी, मीडिया और दूरसंचार (टीएमटी) क्षेत्र में 2030 तक 13 लाख कर्मचारियों के साथ अधिशेष कुशल श्रमबल रहने की संभावना है।
टेक्नोलॉजी के वेब 3.0 युग में कदम रखने के साथ दूरसंचार क्षेत्र में सॉफ्टवेयर का अनुपात इस रिपोर्ट के मुताबिक तीन गुना हो जाएगा। यह रुख इस बात का संकेत देते हैं कि एआई की मदद से वर्ष 2030 तक और अधिक ताकतवर 6जी नेटवर्क टेक्नोलॉजीज उभरेंगी और आईओटी एवं आरपीए,एआई – एमएल, मेटावर्स और 6जी के मूल्य का दोहन कर दूरसंचार एवं टेक उद्योग नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।
