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भारत में निर्मित वस्तुओं का करें उपयोग

पटना : राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने देश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। आर्लेकर ने सोमवार को यहां राजभवन के राजेन्द्र मंडप में ‘विकसित भारत-2047’ पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सही दिशा में प्रयत्न करने पर भारत निश्चित रूप से एक विकसित राष्ट्र बनेगा। इसके लिए आवश्यक है कि हम सकारात्मक सोच के साथ अपने कार्य विशेष के लिए अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करें जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए उपयोगी साबित हो सके।

उन्होंने देश को विकसित बनाने के लिए भारत में निर्मित वस्तुओं का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमें आगामी 25 वर्षों के अमृत काल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य दिया है और इसकी प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है। उन्होंने उनके संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का निर्माण है, जिससे समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव हो सकेगा। आज हमें इस विषय पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षाविदों से कहा कि समाज एवं देश के पुनर्निर्माण का लक्ष्य उनके सामने है।
आर्लेकर ने समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे बच्चों का उचित मार्गदर्शन कर उन्हें योग्य नागरिक बनायें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को शोध एवं अनुसंधान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसानों की आय दोगुनी करना चाहते हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने से ऐसा संभव है। यह भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
इससे पूर्व राज्यपाल ने प्रधानमंत्री द्वारा ‘विकसित भारत-2047.युवाओं की आवाज’ के शुभारंभ कार्यक्रम में वीडियो काॅन्फ्रेंन्सिंग के जरिये राजभवन से भाग लिया। बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शैक्षणिक संस्थानों के निदेशक एवं संकाय सदस्यों ने भी इस कार्यक्रम में वेबकास्ट के जरिये राजभवन के राजेन्द्र मंडप में उपस्थित होकर भाग लिया।
राजेन्द्र मंडप में ‘विकसित भारत-2047’ पर आयोजित कार्यशाला के पैनल डिस्कशन में विभिन्न शिक्षाविदों ने भाग लिया। इस अवसर पर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. सिंह एवं पटना विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्र के प्रो. अतुल आदित्य पांडेय ने ‘विकसित भारत में नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किये, जबकि महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने ‘विश्व में भारत’ पर अपनी विचाराभिव्यक्ति दी।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक, अनुसंधान डाॅ. ए. के. सिंह ने ‘संम्पन्न एवं टिकाऊ अर्थव्यवस्था के तहत भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् के शैक्षणिक सलाहकार प्रो. एन. के. अग्रवाल ने समन्वयक की भूमिका निभायी। उन्होंने ‘विकसित भारत-2047 में विश्वविद्यालय एवं छात्रों की सहभागिता, उसकी रूपरेखा एवं अन्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला।

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