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‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत’

चंडीगढ़ : पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) ने उच्चतम न्यायालय के उस हालिया निर्णय का स्वागत किया है जिसके तहत भाष्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार माना गया है तथा कहा है कि इस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध तर्कसंगत होने चाहिए।
पीयूडीआर सचिव जोसेफ मथई और परमजीत सिंह ने बुधवार को यहाँ जारी बयान में कहा कि शीर्ष अदालत ने पुलिस मशीनरी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अवधारणा समझाने पर जोर देकर सही किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे माहौल में जब नई अपराध संहिताएं लाकर न्यायिक प्रणाली को बदला जा रहा है, पुलिसकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे, उन्हें नागरिक अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने गत सात मार्च को महाराष्ट्र के एक प्रोफ़ेसर के खिलाफ जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर व्हाट्सएप पर नाखुशी जताने वाले और इसे जम्मू-कश्मीर के लिए ‘काला दिन’ बताने वाले संदेश को लेकर भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए के तहत प्राथमिकी खारिज कर दी थी। प्रोफेसर ने एक और संदेश में 14 अगस्त के दिन पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी थी। प्रोफेसर के खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच सांप्रदायिक दुर्भावना फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने अपने निर्णय में कहा किसी भाष्य के प्रभाव की कसौटी तर्कसंगत लोगों के पैमाने पर होनी चाहिए, ने कि कमजोर और लचीले लोगों के पैमाने पर।

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