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योगी कैबिनेट 2.0 : कुछ ऐसे चेहरे जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने उत्तर प्रदेश के सियासत क्वी कई मान्यताओं को तोडा है | 37 साल बाद कोई मुख्मंत्री लगातार दूसरी बार शपथ लिया है और मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा आने के भ्रम को भी तोड़ा बहरहाल योगी कैबिनेट ने इस बार सियासी गलियारे में सबको चौंका दिया है वहीँ  कुछ ऐसे नए चेहरों को अपने कैबिनेट में जगह दी है जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

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दानिश आजाद अंसारी : योगी कैबिनेट में मोहसिन रजा के जगह पे बलिया के युवा नेता दानिश आजाद अंसारी को प्राथमिकता दी है | दानिश अंसारी को योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है. वे एबीवीपी के लंबे समय से कार्यकर्ता रहे हैं. इसके अलावा वे यूपी सरकार की फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल समिति के सदस्य भी रह चुके हैं. वे अभी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री है और विद्यार्थी जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं. । दानिश आजाद अंसारी ने  लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।

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जसवंत सैनी : उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हैं। जसवंत सैनी 1989 में संघ कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया और करीब 32 साल के सफर में संगठन के भीतर तमाम उच्च पद हासिल किए। 2009 में एकमात्र चुनाव लोकसभा का लड़ा, लेकिन नहीं जीत पाए।

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दयाशंकर मिश्र दयालु : प्रधानमंत्री श्री  नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के रहने वाले दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ को भी योगी कैबिनेट में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का पद मिला है। ये दूसरी बार है, जब दयाशंकर को भाजपा ने इनाम दिया है। दयालु जी को  पूर्वांचल विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया था। दयाशंकर मिश्र दयालु डीएवी महाविद्यालय के प्रधानाचार्य है |

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जेपीएस राठौर : जेपीएस राठौर को राज्यमंत्री बनाया गया है। वे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष थे। आईआईटी बीएचयू से बीटेक व एमटेक की शिक्षा प्राप्त की है। वे बीएचयू के छात्र संघ अध्यक्ष भी थे |

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नरेंद्र कश्यप : गाजियाबाद के पूर्व राज्यसभा सांसद और ओबीसी मोर्चा के अध्यक्षर नरेंद्र कश्यप को भी राज्यमंत्री बनाया गया है।

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