नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडरों के नाम और लिंग परिवर्तन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि ट्रांसजेंडर नियमावली में संशोधन कर ट्रांसजेंडरों की मान्यता को अनिवार्य रूप से लागू करें।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की पीठ ने हल्द्वानी के श ट्रांसजेंडर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश दिए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पहले वह ट्रांसजेंडर वर्ग में लड़की के नाम से जाना जाता था।
वर्ष 2020 में उसने सर्जरी कराई और कानूनी तौर पर अपना नाम और लिंग बदल लिया। इसके बाद उसने अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में नाम और परिवर्तन का अनुरोध किया लेकिन उत्तराखंड स्कूली शिक्षा बोर्ड ने उसके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
बोर्ड की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता का मामला नियमावली के अध्याय-12 के खंड 27 के तहत स्वीकार्य नहीं है। इसके तहत केवल उन नामों में बदलाव की अनुमति दी गई है जिसमें अश्लीलता झलकती हो।
अदालत ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत नियमावली में आवश्यक संशोधन कर ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर नियमावली में संशोधन के दिये निर्देश
